जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग ।
जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग ॥
जय जय जननी हरण अघ खानी । आनन्द करनि गंगा महारानी ॥
जय भगीरथी सुरसरि माता । कलिमल मूल दलनि विख्याता ॥
जय जय जहानु सुता अघ हननी । भीष्म की माता जग जननी ॥
धवल कमल दल मदन विनासिनि । ज्ञान दायिनी पाप नासिनि ॥
विष्णु पदी जय शिव सिर जटनी । जयति भगीरथ रथ की पटनी ॥
जाह्नवी जय जय अवनी धरि । अलकनन्दा भागीरथी हरि ॥
जयति मन्दाकिनी त्रिपथ गामिनी । पुण्य पयोधि पाप नाशिनी ॥
जिनके जल की महिमा भारी । वेद पुराण गावत अविकारी ॥
ब्रह्मा कमण्डल ते तुम निकसी । विष्णु चरण पर तुम अति विकसी ॥
शिव जटा में तुम ही समाई । जहाँ से तुम धरा पर आई ॥
सगर पुत्र तरन को काजा । भगीरथ तप कीन्हा महाराजा ॥
तप से प्रसन्न भये शिव शंकर । जटा खोल दीन्हि गंगा धर ॥
जाह्नवी रूप धरा तुम भारी । मुनि जहानु की कन्या प्यारी ॥
पाताल लोक गई तुम माता । सगर पुत्र तरन सुख दाता ॥
दरश परश ते पाप नशावें । अन्धे को आँखें तुम द्यावें ॥
गंगा स्नान महा फल दाई । पाप विनाशिनी मुक्ति सहाई ॥
गंगे गंगे जो जन ध्यावे । सो जन निश्चय परम पद पावे ॥
अन्तक समय गंगा जल पावे । यम के द्वार कभी नहिं जावे ॥
महिमा अगम तुम्हारी माता । वेद पुराण पार नहिं पाता ॥
जो जन तुमको ध्यावे माता । सो जन भव सागर तर जाता ॥
दीन दयाल दया करो माता । तुम हो जग की भाग्य विधाता ॥
रोग शोक सब तुम ही हरती । भक्तों के सब काज संवरती ॥
मैं हूँ दीन मलीन दुखारी । शरण तुम्हारी आया भारी ॥
कृपा दृष्टि करो जगदम्बा । मत करो मोहे अब विलंबा ॥
अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता । सदा सहाय करो तुम माता ॥
पुत्र हीन जो जन तुमको ध्यावे । पुत्र रत्न वह निश्चय पावे ॥
धन हीन जो जन तुमको गावे । ताके घर सम्पत्ति अति आवे ॥
रोगी जो यह पाठ करे नित । रोग मुक्त होवे वह निश्चय ॥
विद्या चाहन जो यह पाठ करे । विद्यावान होवे वह निश्चय ॥
जो जन यह पाठ प्रेम से गावे । तापर कृपा तुम्हारी आवे ॥
मनवांछित फल पावे निश्चय । जो यह पाठ करे चित्त लाये ॥
भक्त जनों की तुम हो रखवारी । महिमा तुम्हारी अमित अपारी ॥
मैं मूरख अज्ञान अनाड़ी । नहिं जानूं कुछ महिमा तुम्हारी ॥
क्षमा करो अपराध हमारे । हम हैं दास प्रभु तुम्हारे ॥
कृपा करो हे जगदम्बा । मत करो मोहे अब विलंबा ॥
गंगा चालीसा जो कोई गावे । सब सुख भोग परम पद पावे ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, पाठ करे चित्त लाये ।
गंगा मैया की कृपा, तापर सदा सुहाये ॥
हरिहर की तुम प्यारी माता । सब जग की तुम प्राण विधाता ॥
करहु कृपा हे परम भवानी । जय जय जय जय जगदम्बा महारानी ॥
कृपा करो हे परम भवानी, दरश दिखाओ मोहि ।
गंगा मैया की जय, सुमिरत पाप नसोहि ॥