भगवान गणेश सनातन धर्म में "प्रथम पूज्य देव" हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, अनुष्ठान या यज्ञ का आरंभ उनके नाम से ही होता है। वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं तथा कार्तिकेय के छोटे भाई हैं। उनका वाहन छोटा सा मूषक (चूहा) है, जो अहंकार-विजय का प्रतीक है।

गणेश जी विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले) और सिद्धिविनायक (कार्य सिद्धि देने वाले) कहलाते हैं। उनकी पत्नियाँ रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (आध्यात्मिक शक्ति) हैं, और पुत्र शुभ-लाभ हैं। इसी कारण घर-घर में "शुभ-लाभ" लिखा जाता है — गणेश परिवार के आशीर्वाद के लिए।

गणेश जी का गजमुख (हाथी का सिर) ज्ञान, बुद्धि और विवेक का प्रतीक है। उनकी बड़ी कान सबकी बात सुनने का संदेश देते हैं, छोटी आँखें सूक्ष्मता का प्रतीक हैं, और बड़ा पेट हर बात को पचाने की क्षमता दर्शाता है। वे "बुद्धि के स्वामी" हैं और लेखकों, विद्यार्थियों एवं व्यवसायियों के विशेष आराध्य हैं।

मुख्य जानकारी

  • पिता: भगवान शिव
  • माता: माता पार्वती
  • भाई: कार्तिकेय
  • पत्नियाँ: रिद्धि और सिद्धि
  • पुत्र: शुभ और लाभ
  • वाहन: मूषक (चूहा)
  • स्थान: सर्वत्र (प्रथम पूज्य)

प्रमुख त्योहार

  • गणेश चतुर्थी: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
  • संकष्टी चतुर्थी: प्रति माह कृष्ण चतुर्थी
  • विनायक चतुर्थी: प्रति माह शुक्ल चतुर्थी
  • अंगारकी चतुर्थी: मंगलवार + संकष्टी
  • गणेश जयंती: माघ शुक्ल चतुर्थी
  • अनंत चतुर्दशी: गणपति विसर्जन दिवस

मंत्र

गणेश जी के मंत्र अत्यंत शक्तिशाली और शीघ्र फलदायी माने जाते हैं। किसी भी कार्य के आरंभ में, परीक्षा से पहले या कठिनाई के समय इन मंत्रों का जप करना अति शुभ है।

ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥
गणपति बाप्पा मोरया

विशेष महत्व

गणेश जी का स्थान सभी देवताओं में सर्वोच्च है — क्योंकि वे "प्रथम पूज्य" हैं। स्वयं शिव-पार्वती ने भी उन्हें यह वरदान दिया कि किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले गणेश पूजा होगी। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ — हर कार्य में गणेश पूजन अनिवार्य है।

गणेश जी का "गजमुख" गहरे आध्यात्मिक अर्थ रखता है। हाथी का सिर बुद्धि, धैर्य और विशालता का प्रतीक है। एक दंत त्याग का संकेत है, और बड़ा पेट संसार की सभी अच्छी-बुरी बातों को पचाने की क्षमता दर्शाता है। उनका मूषक वाहन यह सिखाता है कि अहंकार (छोटी सोच) पर नियंत्रण ही सच्ची सिद्धि है।

महाभारत के लेखक वेद व्यास ने गणेश जी से कहा था — "मैं बोलता रहूँगा, तुम लिखते रहना। बीच में मत रुकना।" गणेश जी ने शर्त रखी कि वे तभी लिखेंगे जब समझ सकें। इसी प्रकार महाभारत लिखी गई। इसीलिए गणेश जी को "लेखक के देवता" भी कहा जाता है।

गणेश जी की प्रमुख कथाएँ

गणेश जी के जीवन की हर कथा भक्ति, विवेक और चमत्कारों से भरी है — यहाँ कुछ प्रमुख कथाओं का परिचय है —

1
अद्भुत जन्म
एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं। उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण फूँक दिए — यही गणेश जी का जन्म था। माता ने उन्हें द्वार पर रखकर कहा "किसी को भी अंदर मत आने देना।"
2
शिव-गणेश युद्ध
तभी भगवान शिव कैलाश लौटे। बाल गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोका। शिव क्रोधित हो गए और बालक से युद्ध किया। अंत में शिव ने त्रिशूल से उनका सिर काट दिया। माता पार्वती जब बाहर आईं और अपने पुत्र को देखा तो वे क्रोध और शोक से भर गईं।
3
गजमुख की प्राप्ति
माता पार्वती को शांत करने के लिए शिव ने वचन दिया कि वे बालक को पुनर्जीवित करेंगे। उन्होंने अपने गणों से कहा "जो भी प्राणी सबसे पहले उत्तर दिशा में दिखे, उसका सिर ले आओ।" गण एक हाथी का सिर ले आए। शिव ने उस सिर को बालक के धड़ से जोड़ दिया — और बालक जीवित हो गए। इसी से वे "गजानन" कहलाए।
4
प्रथम पूज्य वरदान
शिव ने गणेश को वरदान दिया कि किसी भी कार्य, पूजा या अनुष्ठान का आरंभ उनकी पूजा से होगा। साथ ही, सभी देवताओं ने उन्हें विशेष शक्तियाँ दीं — बुद्धि, सिद्धि, विवेक और विघ्न हरने की शक्ति। तभी से वे "विघ्नहर्ता" और "प्रथम पूज्य" कहलाए।
5
एकदंत — परशुराम कथा
एक बार परशुराम शिव से मिलने कैलाश आए। गणेश जी ने उन्हें रोका क्योंकि शिव विश्राम कर रहे थे। क्रोधित परशुराम ने अपने परशु से प्रहार किया। चूँकि परशु शिव का दिया हुआ था, गणेश जी ने सम्मानवश उसका वार स्वयं पर लिया — जिससे उनका एक दाँत टूट गया। तभी से वे "एकदंत" कहलाए।
6
पृथ्वी परिक्रमा प्रतियोगिता
एक बार शिव-पार्वती ने पुत्रों कार्तिकेय और गणेश के बीच प्रतियोगिता रखी — "जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, उसे विशेष फल मिलेगा।" कार्तिकेय अपने मोर पर बैठकर निकल गए। गणेश जी ने सोचा और अपने माता-पिता की तीन परिक्रमा करके कहा "माता-पिता ही मेरी पृथ्वी हैं।" शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें विजयी घोषित किया।
7
महाभारत लेखन
वेद व्यास को महाभारत की रचना करनी थी, परंतु लिखने वाला कोई न था। उन्होंने गणेश जी से प्रार्थना की। गणेश जी ने शर्त रखी "मैं बिना रुके लिखूँगा, परंतु तुम्हें भी बिना रुके बोलना होगा।" व्यास ने भी शर्त रखी "मैं समझकर ही बोलूँगा, तुम भी समझकर ही लिखना।" इस प्रकार महाभारत की रचना हुई।
8
चंद्र दर्शन दोष की कथा
एक बार गणेश जी मोदक खाकर मूषक पर चढ़े जा रहे थे। मूषक डर गया, गणेश गिर पड़े। पास खड़े चंद्रमा ने हँसी उड़ाई। क्रोधित गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया कि "भाद्रपद चतुर्थी को जो तुम्हारा दर्शन करेगा, उस पर कलंक लगेगा।" श्रीकृष्ण को भी स्यमंतक मणि के संदर्भ में यही श्राप झेलना पड़ा था।

प्रमुख त्योहार (विस्तृत)

गणेश जी के त्योहार पूरे भारत में, विशेष रूप से महाराष्ट्र में, अत्यंत भव्यता से मनाए जाते हैं —

गणेश चतुर्थी
भाद्रपदशुक्लचतुर्थी
अगस्त-सितंबर · 10 दिवसीय उत्सव (महाराष्ट्र में विश्व प्रसिद्ध)
गणेश जी का जन्मोत्सव — 10 दिनों तक चलने वाला महोत्सव। घरों और पंडालों में गणेश मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं। प्रतिदिन आरती, मोदक का भोग, और भजन-कीर्तन होते हैं। अनंत चतुर्दशी पर "गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के जयघोष के साथ विसर्जन होता है।
मूर्ति स्थापनामोदक10 दिनविसर्जन
संकष्टी चतुर्थी
कृष्ण चतुर्थीमासिक
प्रति माह · संकट निवारण के लिए
हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद ही भोजन करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
मासिक व्रतचंद्र दर्शनसंकट निवारण
अंगारकी चतुर्थी
मंगलवार + संकष्टी
वर्ष में 2-3 बार · अत्यंत शुभ
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। यह वर्ष में मात्र 2-3 बार आती है और अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से 21 अन्य चतुर्थियों का फल मिलता है।
दुर्लभ21 गुना फल
गणेश जयंती
माघशुक्ल चतुर्थी
जनवरी-फरवरी · महाराष्ट्र-गोवा में विशेष
माघ शुक्ल चतुर्थी को गणेश जयंती मनाई जाती है — मान्यता है कि इसी दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। महाराष्ट्र और गोवा में विशेष आयोजन होते हैं। इसे "तिल कुंद चौथ" भी कहते हैं और इस दिन तिल का प्रसाद बाँटा जाता है।
जयंतीतिल प्रसाद

आइकनोग्राफी व गुण

गणेश जी की आइकनोग्राफी अत्यंत प्रतीकात्मक है — हर लक्षण आध्यात्मिक संदेश देता है —

गजमुख (हाथी का सिर) एक दंत बड़े कान लंबा पेट पाश और अंकुश मोदक मूषक वाहन सिंदूरी वर्ण बुद्धि के स्वामी विघ्नहर्ता सिद्धिविनायक प्रथम पूज्य मंगलकारी शुभ-लाभ दाता
परिवार: शिव (पिता), पार्वती (माता), कार्तिकेय (बड़े भाई), रिद्धि-सिद्धि (पत्नियाँ), शुभ-लाभ (पुत्र), मूषक (वाहन)। 32 रूप: गणेश जी के 32 प्रमुख स्वरूप हैं — बाल गणेश, भक्ति गणेश, सिद्धि गणेश, बीज गणेश, उच्छिष्ट गणेश आदि। अष्टविनायक: महाराष्ट्र में 8 स्वयंभू गणेश मंदिर हैं — मोरगाँव, थेऊर, सिद्धटेक, रंजनगाँव, ओजर, लेन्याद्री, महाड और पाली।

प्रमुख पावन स्थल

गणेश जी के मंदिर पूरे भारत में फैले हैं। यहाँ चार सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी स्थल दिए गए हैं —

श्री सिद्धिविनायक मंदिर
मुंबई, महाराष्ट्र
मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिर — "मनोकामना पूर्ण करने वाले सिद्धिविनायक" के रूप में विश्व विख्यात। बॉलीवुड और व्यापारियों का सर्वाधिक श्रद्धा स्थल। मंगलवार को विशेष भीड़।
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दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर
पुणे, महाराष्ट्र
पुणे का सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिर — 1893 में स्थापित। दगडूशेठ नामक हलवाई के पुत्र की मृत्यु के बाद उन्होंने यह मंदिर बनवाया था। गणेश चतुर्थी पर 10 दिनों तक भव्य उत्सव होता है।
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श्री महागणपति मंदिर, रनथंभोर
रनथंभोर, सवाई माधोपुर, राजस्थान
त्रिनेत्र गणेश के रूप में विश्व प्रसिद्ध — एकमात्र स्वयंभू त्रिनेत्र (तीन आँखों वाले) गणेश। मान्यता है कि सबसे पहले विवाह की पत्रिका यहाँ भेजी जाती है। रोज़ हजारों डाक यहाँ आती है।
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मोती डूंगरी गणेश मंदिर
जयपुर, राजस्थान
जयपुर का प्रमुख गणेश मंदिर — मोती डूंगरी पहाड़ी पर स्थित। 1761 में निर्मित। बुधवार को विशेष भीड़ होती है। नवविवाहित जोड़े यहाँ आशीर्वाद लेने आते हैं और नई गाड़ियों की पूजा का प्रसिद्ध स्थल।
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संबंधित ग्रन्थ

गणेश जी की महिमा का वर्णन अनेक पवित्र ग्रंथों में मिलता है —

गणेश पुराण मुद्गल पुराण गणपति अथर्वशीर्ष ब्रह्म पुराण शिव पुराण गणेश सहस्रनाम संकष्टनाशन स्तोत्र गणेश चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश जी को "प्रथम पूज्य" क्यों कहा जाता है?

स्वयं भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया था कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान में सबसे पहले उनकी पूजा होगी। पृथ्वी परिक्रमा प्रतियोगिता में गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा करके सिद्ध किया कि वे सबसे विवेकी हैं। तब से हर कार्य का आरंभ "श्री गणेशाय नमः" से होता है।

गणेश जी का हाथी का सिर कैसे आया?

माता पार्वती ने उबटन से बालक बनाकर प्राण फूँके थे। जब शिव कैलाश लौटे, तो बालक गणेश ने उन्हें द्वार पर रोका। क्रोधित शिव ने त्रिशूल से उनका सिर काट दिया। माता पार्वती के शोक को देखकर शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि उत्तर दिशा में जो भी प्राणी पहले मिले, उसका सिर लाओ। एक हाथी का सिर मिला, जिसे गणेश जी के धड़ से जोड़ा गया।

गणेश चतुर्थी क्यों और कैसे मनाई जाती है?

गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त-सितंबर) को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। 10 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव विशेष रूप से महाराष्ट्र में बहुत भव्यता से मनाया जाता है। घरों और पंडालों में मूर्तियाँ स्थापित होती हैं, मोदक का भोग, आरती होती है। अंतिम दिन (अनंत चतुर्दशी) पर "गणपति बाप्पा मोरया" के जयघोष के साथ विसर्जन होता है।

मोदक गणेश जी का प्रिय भोग क्यों है?

मोदक चावल या मैदा से बना एक मीठा व्यंजन है, जिसमें नारियल-गुड़ का भरावन होता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने स्वयं अपने हाथों से गणेश जी के लिए पहला मोदक बनाया था। मोदक का बाहरी आवरण कठिन परिश्रम का प्रतीक है, और अंदर की मिठास उसका मधुर फल। इसीलिए गणेश जी को 21 मोदक का भोग लगाने की परंपरा है।

गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) क्यों है?

मूषक (चूहा) अहंकार और छोटी सोच का प्रतीक है। गणेश जी का विशाल शरीर और छोटा वाहन यह संदेश देता है कि चाहे आप कितने भी महान क्यों न हों, अहंकार पर नियंत्रण ही सच्ची सिद्धि है। मूषक रात में सक्रिय रहता है — जो अंधकार (अज्ञान) में भी ज्ञान की खोज का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, मूषक पहले क्रौंच नामक गंधर्व था।

गणेश जी "एकदंत" क्यों कहलाए?

एक बार परशुराम शिव से मिलने कैलाश आए। गणेश जी ने उन्हें रोका क्योंकि शिव विश्राम कर रहे थे। क्रोधित परशुराम ने अपने परशु (कुल्हाड़ी) से प्रहार किया। चूँकि परशु शिव का दिया हुआ था, गणेश जी ने सम्मानवश उसका वार स्वयं पर लिया — जिससे उनका एक दाँत टूट गया। तभी से वे "एकदंत" कहलाए। एक अन्य कथा में महाभारत लेखन के समय अपनी कलम टूटने पर उन्होंने अपना दाँत तोड़कर लिखा था।

गणेश जी की पूजा कैसे करें?

घर पर गणेश पूजा सरल है — सुबह स्नान के बाद गणेश जी की मूर्ति/छवि के समक्ष दीप जलाएँ, सिंदूर अर्पित करें, लाल फूल (गुड़हल) और 21 दूर्वा (दूब घास) चढ़ाएँ, "ॐ गं गणपतये नमः" का 108 बार जाप करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ। बुधवार और संकष्टी चतुर्थी विशेष शुभ हैं। किसी भी नए कार्य से पहले गणेश वंदना अवश्य करें।

दूर्वा (दूब घास) गणेश जी को क्यों चढ़ाई जाती है?

एक बार अनलासुर नामक राक्षस ने पूरे जगत को विषाक्त कर दिया। गणेश जी ने उसे निगल लिया, परंतु पेट में जलन होने लगी। 88 ऋषियों ने उन्हें 21-21 दूर्वा के तिनके खिलाए — जिससे जलन शांत हुई। तभी से दूर्वा गणेश जी को सर्वाधिक प्रिय है। मान्यता है कि 21 दूर्वा चढ़ाने से सहस्र पूजाओं का फल मिलता है।

अष्टविनायक क्या हैं?

अष्टविनायक महाराष्ट्र में 8 स्वयंभू गणेश मंदिर हैं — मोरगाँव (मयूरेश्वर), थेऊर (चिंतामणि), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), रंजनगाँव (महागणपति), ओजर (विघ्नेश्वर), लेन्याद्री (गिरिजात्मज), महाड (वरदविनायक) और पाली (बल्लालेश्वर)। आठों मंदिरों की यात्रा करना अत्यंत पुण्यप्रद माना जाता है।

गणेश विसर्जन का क्या महत्व है?

गणेश चतुर्थी के 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी पर गणेश मूर्ति का विसर्जन (जल में प्रवाह) किया जाता है। यह संदेश देता है कि कुछ भी स्थायी नहीं है — सृष्टि, स्थिति और संहार चक्र चलता रहता है। मूर्ति मिट्टी में लौटती है और प्रकृति में मिल जाती है। आजकल पर्यावरण रक्षा हेतु मिट्टी की मूर्तियाँ और प्रतीकात्मक विसर्जन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

क्या गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन वर्जित है?

हाँ, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। पुराण के अनुसार, चंद्रमा ने एक बार गणेश जी की हँसी उड़ाई थी, जिस पर गणेश ने श्राप दिया कि "इस दिन तुम्हारा दर्शन करने वाले पर कलंक लगेगा।" यदि अनजाने में चंद्र दर्शन हो जाए, तो स्यमंतक मणि की कथा सुनने या पढ़ने से दोष मुक्ति होती है।

गणेश जी की पूजा से क्या लाभ होते हैं?

गणेश पूजा से अनेक लाभ होते हैं — सभी विघ्नों का नाश, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि, कार्य सिद्धि, व्यवसाय में सफलता, परीक्षा में सफलता, गृह कलह की शांति, और सुख-समृद्धि। नए घर का प्रवेश, विवाह, व्यापार आरंभ — हर शुभ कार्य गणेश पूजा से शुरू होता है। उनकी पत्नियाँ रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ — सब कुछ देते हैं।