श्री हनुमान जी सनातन धर्म में राम भक्ति, शक्ति, साहस और बुद्धि के सर्वोच्च प्रतीक हैं। वे रुद्र अवतार माने जाते हैं — स्वयं भगवान शिव ने राम सेवा हेतु यह रूप धारण किया। उनकी माता अंजनी और पिता वानर राज केसरी थे, परंतु पवन देव की कृपा से जन्म होने के कारण वे "पवन पुत्र" कहलाए।

हनुमान जी का जीवन रामायण की आत्मा है। उन्होंने सीता माता को लंका में खोजा, समुद्र लाँघा, लंका दहन किया, संजीवनी पर्वत उठाकर लाए और अंत में राम-रावण युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई। वे "चिरंजीवी" हैं — आज भी जहाँ रामकथा होती है, वहाँ हनुमान जी सूक्ष्म रूप से उपस्थित रहते हैं।

हनुमान जी की भक्ति का सबसे बड़ा संदेश है — "समर्पण और सेवा"। उन्होंने राम को अपना सर्वस्व मान लिया और अपने बल-बुद्धि का प्रयोग केवल राम-सेवा के लिए किया। यही कारण है कि वे "राम-दूत" कहलाते हैं और कलियुग में संकटों से रक्षा करने वाले प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं।

मुख्य जानकारी

  • माता: अंजनी
  • पिता: केसरी (वानर राज)
  • दिव्य पिता: पवन देव
  • अवतार: रुद्र अवतार (शिव)
  • आराध्य: भगवान श्रीराम
  • जन्म स्थान: अंजनी पर्वत (कर्नाटक/झारखंड)
  • स्थिति: चिरंजीवी (अमर)

प्रमुख त्योहार

  • हनुमान जयंती: चैत्र पूर्णिमा
  • दक्षिण भारत में: मार्गशीर्ष अमावस्या
  • मंगलवार: साप्ताहिक हनुमान पूजा
  • शनिवार: हनुमान चालीसा पाठ
  • राम नवमी: रामभक्त रूप में पूजा
  • दशहरा: राम विजय में सहायक

मंत्र

हनुमान जी के मंत्र अत्यंत शक्तिशाली माने जाते हैं — ये भय, संकट, ग्रह दोष और बुरी शक्तियों से रक्षा करते हैं। मंगलवार और शनिवार को इनका जप विशेष फलदायी है।

ॐ हं हनुमते नमः
ॐ श्री हनुमते नमः
मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

विशेष महत्व

हनुमान जी को "अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता" कहा गया है। उनके पास आठ सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) और नौ निधियाँ हैं — जो भक्तों को सीता माता के आशीर्वाद से प्राप्त हुई थीं।

तुलसीदास द्वारा रचित "हनुमान चालीसा" 40 चौपाइयों का सबसे प्रसिद्ध भक्ति काव्य है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से सभी संकट दूर होते हैं, भय नष्ट होता है और राम भक्ति की प्राप्ति होती है।

हनुमान जी चिरंजीवी हैं — सात अमर देवताओं में से एक। माना जाता है कि वे आज भी हिमालय की किसी गुप्त गुफा में राम नाम का जप कर रहे हैं। जहाँ-जहाँ रामकथा होती है, हनुमान जी वहाँ सूक्ष्म रूप से आते हैं — इसलिए रामायण पाठ में उनके लिए एक आसन छोड़ने की परंपरा है।

हनुमान जी की प्रमुख कथाएँ

हनुमान जी की कथाएँ साहस, भक्ति और चमत्कारों से भरी हैं — यहाँ कुछ प्रमुख कथाओं का वर्णन है —

1
दिव्य जन्म
माता अंजनी और वानर राज केसरी के यहाँ हनुमान जी का जन्म हुआ। पवन देव की कृपा से उन्हें असाधारण शक्तियाँ प्राप्त थीं। बाल हनुमान ने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया, जिससे इंद्र ने उन पर वज्र चलाया — और उनकी ठोड़ी (हनु) टूट गई। इसी से उनका नाम "हनुमान" पड़ा।
2
देवताओं के वरदान
पवन देव क्रोधित होकर वायु को रोक देने से सभी देवता पुत्र हनुमान को वरदान देने आए। ब्रह्मा ने अमरत्व, इंद्र ने वज्र से अभय, शिव ने ज्ञान, सूर्य ने तेज, यम ने दंड से रक्षा, कुबेर ने ऐश्वर्य, और सभी ने अनेक सिद्धियाँ प्रदान कीं। परंतु ऋषियों ने उन्हें भूलने का श्राप दिया कि अपनी शक्ति याद करने पर ही वे इस्तेमाल कर पाएँगे।
3
राम-सेवा का आरंभ
वनवास के दौरान सीता हरण के बाद राम-लक्ष्मण किष्किंधा पहुँचे। हनुमान जी ने उनकी पहचान सुग्रीव से कराई और तभी से वे राम के परम भक्त बन गए। राम ने उन्हें वरदान दिया कि वे सदा उनके साथ रहेंगे। सीता माता की खोज में हनुमान जी ने अद्भुत भूमिका निभाई।
4
समुद्र लंघन
सीता माता की खोज में हनुमान जी को समुद्र लाँघना था। जाम्बवंत ने उनकी शक्तियाँ याद दिलाईं। हनुमान जी विशाल रूप धारण कर 100 योजन (≈800 किमी) समुद्र पार कर लंका पहुँचे। रास्ते में सुरसा, सिंहिका जैसी राक्षसियों को परास्त किया।
5
सीता दर्शन और लंका दहन
लंका में अशोक वाटिका में सीता माता से भेंट करके राम जी की मुद्रिका दी और उनका कुशल समाचार पाया। फिर हनुमान जी ने रावण की सभा में जाकर अपना परिचय दिया और रावण को धर्म का उपदेश दिया। रावण ने उनकी पूँछ में आग लगाई — और उसी आग से उन्होंने पूरी लंका जला दी
6
संजीवनी पर्वत
राम-रावण युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हो गए। वैद्य सुषेण ने हिमालय की संजीवनी बूटी मँगवाई। हनुमान जी ने संपूर्ण द्रोणागिरि पर्वत उठाकर लंका लाई। मार्ग में भरत ने वानर समझकर बाण चलाया, परंतु राम-नाम सुनकर भरत ने उन्हें सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाया।
7
अहिरावण-वध और रामार्चा
अहिरावण राम-लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था। हनुमान जी ने पाताल जाकर अहिरावण का वध किया और राम-लक्ष्मण को बचाया। उन्होंने पंच-मुखी रूप धारण किया — जिसमें वराह, गरुड़, सिंह, हयग्रीव और हनुमान — पाँचों मुख थे।
8
चिरंजीवी वरदान और सीता का आशीर्वाद
युद्ध समाप्ति और राम-राज्याभिषेक के बाद हनुमान जी ने राम से अपनी सेवा निरंतर माँगी। राम ने उन्हें चिरंजीवी (अमर) रहने का वरदान दिया। सीता माता ने उन्हें अष्ट सिद्धि और नव निधि भक्तों को देने का आशीर्वाद दिया। तभी से वे "संकटमोचन" कहलाते हैं।

प्रमुख त्योहार (विस्तृत)

हनुमान जी से जुड़े त्योहार बड़ी श्रद्धा से मनाए जाते हैं — मंगलवार और शनिवार उनके विशेष दिन हैं —

हनुमान जयंती
चैत्रपूर्णिमा
अप्रैल · पूरे भारत में भव्य उत्सव
हनुमान जी का जन्मोत्सव। भक्त उपवास रखते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड और बजरंग बाण का जाप करते हैं। मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन होता है। बूँदी के लड्डू, सिंदूर, चोला अर्पित किया जाता है।
जन्मोत्सवचालीसा पाठसुंदरकांडसिंदूर चोला
मंगलवार व्रत
साप्ताहिकप्रति मंगलवार
हर सप्ताह · सबसे प्रिय दिन
हनुमान जी को मंगलवार सबसे प्रिय है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, मंदिर जाते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। ग्रह दोष, शनि की पीड़ा और भय से मुक्ति के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
साप्ताहिक व्रतशनि शांति
शनिवार पूजा
साप्ताहिक
हर शनिवार · शनि दोष निवारण
हनुमान जी ने शनि को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके बदले शनि ने हनुमान भक्तों को कभी कष्ट न देने का वचन दिया। शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड पाठ से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
शनि शांतितेल चढ़ाना
सुंदरकांड पाठ
किसी भी दिन
रामचरितमानस का सुंदरकांड · विशेष फलदायी
रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी की लंका यात्रा, सीता दर्शन और लंका दहन की कथा है। मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और कार्य सिद्ध होते हैं। मंगलवार और शनिवार इसका पाठ विशेष फलदायी है।
रामचरितमानसबाधा निवारणकार्य सिद्धि

आइकनोग्राफी व गुण

हनुमान जी की आइकनोग्राफी अत्यंत प्रतीकात्मक है — हर लक्षण उनकी शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक है —

गदा पर्वत (द्रोणागिरि) वज्र पूँछ सिंदूर लेपन रुद्राक्ष माला हृदय में राम-सीता केसरिया वस्त्र अष्ट सिद्धि नव निधि ब्रह्मचर्य साहस सेवा भाव चिरंजीवी
विशेष स्वरूप: पंचमुखी हनुमान — वराह, गरुड़, सिंह, हयग्रीव और हनुमान — पाँच मुखों वाला रूप, जो अहिरावण-वध के समय धारण किया था। दास हनुमान — राम के चरणों में बैठे विनम्र भक्त रूप। लेटे हुए हनुमान — दुर्लभ रूप (प्रयागराज में) जहाँ हनुमान जी विश्राम मुद्रा में हैं।

प्रमुख पावन स्थल

हनुमान जी के मंदिर भारत के कोने-कोने में हैं। यहाँ चार सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी स्थलों का परिचय है —

श्री सालासर बालाजी
सालासर, चूरू, राजस्थान
"दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान" के लिए विश्व प्रसिद्ध — एकमात्र मंदिर जहाँ हनुमान जी के दाढ़ी-मूँछ हैं। मनोकामना पूर्ण करने वाले देवता के रूप में प्रसिद्ध। शनिवार, मंगलवार को भारी भीड़।
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श्री मेहंदीपुर बालाजी
मेहंदीपुर, दौसा, राजस्थान
"भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति" के लिए विश्व प्रसिद्ध — यहाँ बालाजी, प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा तीनों की पूजा होती है। तंत्र-मंत्र बाधा, मानसिक रोगों से पीड़ित भक्त यहाँ आते हैं।
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श्री हनुमान गढ़ी
अयोध्या, उत्तर प्रदेश
अयोध्या का सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिर — 76 सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचना होता है। मान्यता है कि राम मंदिर दर्शन से पहले यहाँ दर्शन करना अनिवार्य है। हनुमान जी अयोध्या के रक्षक माने जाते हैं।
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लेटे हुए हनुमान जी मंदिर
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
विश्व का एकमात्र मंदिर जहाँ हनुमान जी लेटे हुए रूप में विराजमान हैं — संगम तट पर स्थित। 20 फीट लंबी विशाल मूर्ति। मान्यता है कि सीता माता ने हनुमान जी को विश्राम दिया था, इसलिए वे यहाँ लेटे हुए हैं।
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संबंधित ग्रन्थ

हनुमान जी की महिमा का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है। उनके पाठ से जीवन की हर बाधा दूर होती है —

हनुमान चालीसा बजरंग बाण सुंदरकांड (रामचरितमानस) हनुमान अष्टक हनुमान बाहुक रामायण (वाल्मीकि) हनुमत् सहस्रनाम आनंद रामायण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?

उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा (अप्रैल) को मनाई जाती है — यह हनुमान जी का जन्मोत्सव है। दक्षिण भारत (विशेष रूप से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश) में मार्गशीर्ष अमावस्या को मनाई जाती है। महाराष्ट्र में चैत्र पूर्णिमा को मानते हैं।

हनुमान चालीसा का क्या महत्व है?

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 40 चौपाइयों का पवित्र काव्य है। मान्यता है कि नियमित पाठ करने से सभी संकट दूर होते हैं, भय नष्ट होता है, शनि की पीड़ा शांत होती है और राम-भक्ति की प्राप्ति होती है। मंगलवार और शनिवार पाठ विशेष फलदायी है।

हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?

एक बार हनुमान जी ने देखा कि सीता माता अपनी माँग में सिंदूर लगा रही हैं। उन्होंने पूछा क्यों, तो सीता माता ने कहा "राम जी की दीर्घ आयु के लिए"। तब हनुमान जी ने सोचा कि अगर थोड़ा सिंदूर इतना फल देता है, तो पूरे शरीर में लगाने से राम जी अमर हो जाएँगे — और सिंदूर अपने पूरे शरीर पर लगा लिया। तभी से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है।

क्या हनुमान जी अभी भी जीवित हैं?

हाँ, हनुमान जी "चिरंजीवी" हैं — सात अमर देवताओं में से एक (अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम)। राम ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया था। मान्यता है कि वे आज भी हिमालय की किसी गुफा में राम नाम का जप कर रहे हैं। जहाँ रामकथा होती है, वहाँ सूक्ष्म रूप से उपस्थित रहते हैं।

हनुमान जी और शनि देव का क्या सम्बन्ध है?

हनुमान जी ने शनि को रावण के बंधन से मुक्त कराया था। बदले में शनि देव ने वचन दिया कि वे कभी भी हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं देंगे। यही कारण है कि शनि की दशा या साढ़े साती के समय हनुमान चालीसा या सुंदरकांड पाठ से शनि की पीड़ा शांत होती है। शनिवार को हनुमान जी को तेल अर्पित किया जाता है।

हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

घर पर हनुमान पूजा सरल है — सुबह स्नान के बाद हनुमान जी की मूर्ति/छवि के समक्ष दीप जलाएँ (विशेष चमेली का तेल), सिंदूर अर्पित करें, लाल फूल (गुड़हल) चढ़ाएँ, हनुमान चालीसा का 1, 7 या 11 बार पाठ करें। बूँदी के लड्डू, चना-गुड़ या बेसन का भोग लगाएँ। मंगलवार और शनिवार विशेष शुभ हैं।

पंचमुखी हनुमान क्या है?

अहिरावण द्वारा राम-लक्ष्मण के अपहरण के समय हनुमान जी ने पाँच मुखों वाला विशाल रूप धारण किया था — पंचमुखी हनुमान। पाँच मुख हैं — हनुमान (पूर्व), गरुड़ (पश्चिम), वराह (उत्तर), नरसिंह (दक्षिण) और हयग्रीव (ऊर्ध्व)। यह रूप अत्यंत शक्तिशाली और रक्षाकारी माना जाता है।

हनुमान जी ने सूर्य को कैसे निगला था?

बाल हनुमान को भूख लगी, और उन्होंने उगते सूर्य को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इससे सम्पूर्ण जगत में अंधकार छा गया। इंद्र ने उन पर वज्र चलाया, जिससे उनकी ठोड़ी (हनु) टूट गई और वे मूर्छित हो गए। तब पवन देव क्रोधित होकर वायु रोक देने से सभी देवता उन्हें वरदान देने आए। तभी से उनका नाम "हनुमान" पड़ा।

बजरंग बाण क्या है?

बजरंग बाण तुलसीदास द्वारा रचित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। "बाण" शब्द से तात्पर्य है कि यह सीधे हनुमान जी तक पहुँचता है। इसका पाठ संकट के समय किया जाता है — शत्रु बाधा, भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र के दुष्प्रभाव, और गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए। परंतु इसका पाठ अत्यंत श्रद्धा और शुद्धता से करना चाहिए।

लेटे हुए हनुमान मंदिर का क्या रहस्य है?

प्रयागराज में संगम तट पर "लेटे हुए हनुमान जी" का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि लंका दहन के बाद हनुमान जी थक गए थे और सीता माता के कहने पर उन्होंने यहाँ विश्राम किया। 20 फीट लंबी विशाल मूर्ति लेटी मुद्रा में है। गंगा के बढ़े जलस्तर में डूब जाने पर भी मंदिर सुरक्षित रहता है — इसे चमत्कार माना जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी की क्या विशेषता है?

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भूत-प्रेत बाधा, तंत्र-मंत्र दोष और मानसिक रोगों से मुक्ति के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ बालाजी (हनुमान), प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा तीनों की पूजा होती है। यहाँ कुछ विशेष नियम हैं — मंदिर में चढ़ाया प्रसाद घर नहीं ले जाते, पीछे मुड़कर नहीं देखते।

हनुमान जी ब्रह्मचारी क्यों रहे?

हनुमान जी ने राम भक्ति के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया। उन्होंने अपना जीवन पूर्णतः राम-सीता की सेवा को समर्पित कर दिया। हालाँकि कुछ पुराणों में मकरध्वज नामक एक पुत्र का उल्लेख है, जो उनके पसीने से उत्पन्न हुआ था। ब्रह्मचर्य के कारण ही उनमें असाधारण शक्तियाँ थीं।