महत्ता

दशहरा या विजयादशमी बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का महापर्व है। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, ठीक शारदीय नवरात्रि के समापन के अगले दिन। इस दिन को हिंदू पंचांग के तीन सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है — कोई भी नया कार्य, खरीदारी, यात्रा या निवेश इस दिन बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है।

उत्सव

शाम के समय खुले मैदानों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतले बनाए जाते हैं, जिनमें पटाखे भरकर अग्नि के तीर से दहन किया जाता है। पूरे देश में रामलीला का भव्य मंचन होता है — नवरात्रि से शुरू होकर दशहरे के दिन रावण वध के दृश्य के साथ इसका समापन होता है। बंगाल में इसी दिन दुर्गा माँ की विदाई होती है, सिंदूर खेला खेला जाता है और मूर्ति विसर्जन किया जाता है।

इतिहास

त्रेता युग में जब लंकापति रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया, तब भगवान श्री राम ने वानर सेना के साथ लंका पर आक्रमण किया। नौ दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद, दसवें दिन यानी आश्विन शुक्ल दशमी को भगवान राम ने रावण का वध कर दिया और माता सीता को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में यह दिन "विजयादशमी" के नाम से मनाया जाता है। यह दिन सत्य, धर्म और मर्यादा की महान विजय का प्रतीक है।

पौराणिक कथा - माँ दुर्गा की विजय

एक अन्य प्रसिद्ध कथा के अनुसार, महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था जिसे ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि कोई पुरुष उसका वध नहीं कर सकता। उसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। तब सभी देवताओं के तेज से माँ दुर्गा का प्रकट्य हुआ।

माँ दुर्गा ने महिषासुर से लगातार नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया। महिषासुर अनेक रूप बदलता रहा — कभी भैंसे का रूप, कभी सिंह का, कभी मानव का। अंततः दसवें दिन माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया और "महिषासुर मर्दिनी" कहलाईं। इस प्रकार दशहरा माँ दुर्गा की विजय का भी प्रतीक है।

परंपराएं और रीति-रिवाज
  • रावण दहन — रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन
  • रामलीला मंचन — रामायण की कथा का नाट्य रूप
  • शस्त्र पूजा — हथियारों, औजारों और वाहनों की पूजा
  • शमी वृक्ष पूजन — पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी परंपरा
  • अपराजिता पूजा — विजय की देवी अपराजिता का पूजन
  • विजया तिलक — माथे पर तिलक लगाकर एक-दूसरे को बधाई
  • नीलकंठ दर्शन — इस दिन नीलकंठ पक्षी देखना शुभ माना जाता है
  • सिंदूर खेला — बंगाल में महिलाओं द्वारा माँ दुर्गा को विदाई
पूजा विधि
  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें (लाल या पीले शुभ)
  • घर के पूजा स्थान को साफ करके सुसज्जित करें
  • भगवान राम और माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
  • अपराजिता देवी की पूजा करें — शुभ कार्यों में विजय हेतु
  • शस्त्र पूजा — सभी हथियार, औजार और वाहनों पर तिलक लगाएं
  • शमी वृक्ष या उसके पत्तों की पूजा करें
  • विजय मुहूर्त (दोपहर) में विशेष पूजा-अनुष्ठान
  • परिवारजनों को विजया तिलक लगाकर मिठाई बांटें
  • शाम को रावण दहन और रामलीला देखने जाएं
विजय मंत्र
अपराजिता पूजा मंत्र —
हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला ।
अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम ॥
अर्थ: विचित्र हार धारण किए हुए, चमकते कनक मेखला से सुशोभित, कल्याणकारी देवी अपराजिता मुझे विजय प्रदान करें।
श्री राम जय राम जय जय राम ॥
श्री राम का सर्वशक्तिशाली नाम — इसी मंत्र के स्मरण से भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी।
शुभ मुहूर्त 2026
दशमी तिथि
आश्विन शुक्ल दशमी
रावण दहन समय
सूर्यास्त के बाद
विशेष व्यंजन

दशहरा का कोई एक निश्चित मुख्य व्यंजन नहीं है, परंतु क्षेत्र के अनुसार विशेष व्यंजन प्रसिद्ध हैं। उत्तर भारत में जलेबी सबसे प्रसिद्ध है — मान्यता है कि भगवान राम को जलेबी (शष्कुली) अत्यंत प्रिय थी, इसलिए विजय के बाद यही मुख्य प्रसाद बना।

जलेबी (उत्तर भारत) फाफड़ा-जलेबी (गुजरात) पान कढ़ी-चावल शीरा (हलवा) सोहन हलवा पुरण पोली (महाराष्ट्र) रसगुल्ला (बंगाल) मैसूर पाक (कर्नाटक) अप्पम (दक्षिण भारत)
शस्त्र पूजा का महत्व

दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा महाभारत काल से जुड़ी है। पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने सभी अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। एक वर्ष बाद इसी विजयादशमी के दिन उन्होंने शमी वृक्ष से अपने शस्त्र निकाले, उनकी पूजा की और कौरवों पर विजय प्राप्त की। आज भी सेना, पुलिस, व्यापारी और कारीगर अपने उपकरणों, हथियारों, मशीनों और वाहनों की पूजा करते हैं। यह प्रथा अपने "कर्म के साधनों के प्रति श्रद्धा" का प्रतीक है।

क्षेत्रीय विविधताएं
  • मैसूर (कर्नाटक) — जम्बू सवारी, राजसी हाथी जुलूस और भव्य आतिशबाजी
  • कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) — 7 दिनों का अंतर्राष्ट्रीय दशहरा मेला, रघुनाथ जी की रथ यात्रा
  • बस्तर (छत्तीसगढ़) — 75 दिनों का अनूठा दशहरा, माँ दंतेश्वरी की पूजा
  • पश्चिम बंगाल — दुर्गा माँ की विदाई, सिंदूर खेला, धुनुची नृत्य
  • उत्तर प्रदेश — रामनगर वाराणसी की 31 दिनों की रामलीला विश्व प्रसिद्ध
  • दिल्ली — रामलीला मैदान का विशाल रावण दहन
  • गुजरात — गरबा-डांडिया का समापन और शस्त्र पूजा
क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • नई शुरुआत करें (खरीदारी, व्यापार, यात्रा)
  • शस्त्र और औजारों की पूजा करें
  • बड़ों का सम्मान और आशीर्वाद लें
  • शमी और अपराजिता का पूजन करें
  • विजया तिलक लगाकर मिठाई बांटें

क्या न करें

  • अहंकार और घमंड से बचें (रावण से सीख)
  • पर्यावरण प्रदूषण न फैलाएं (eco-friendly पटाखे)
  • किसी का अपमान न करें
  • क्रोध और झूठ से दूर रहें
  • दूसरों की वस्तुओं का अपहरण/चोरी न करें