रक्षा बंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के संकल्प का पवित्र पर्व है। यह श्रावण पूर्णिमा के दिन पूरे भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती हैं, उनकी दीर्घायु और मंगलकामना के लिए प्रार्थना करती हैं, और भाई जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं।
इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, उनके माथे पर तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं और आरती उतारती हैं। भाई बहन को आशीर्वाद, उपहार और आजीवन सुरक्षा का वचन देते हैं। पूरा परिवार एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाता है।
इतिहास में रानी कर्णावती द्वारा मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर सुरक्षा मांगने की कथा अत्यंत प्रसिद्ध है। जब बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया, तब रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजी, और हुमायूं ने धर्म-बहन का कर्तव्य निभाते हुए सहायता भेजी। यह कथा हिंदू-मुस्लिम एकता और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है।
पौराणिक कथा के अनुसार देवराज इंद्र की पत्नी इंद्राणी (शची) ने असुरों से रक्षा हेतु इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे इंद्र विजयी हुए। एक अन्य कथा में, द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण के घायल हाथ पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था, और श्रीकृष्ण ने उन्हें आजीवन रक्षा का वचन दिया था — जो चीरहरण के समय निभाया गया।
- राखी बांधना — बहन भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है
- तिलक लगाना — माथे पर रोली-चावल का तिलक
- आरती उतारना — दीप जलाकर भाई की आरती
- मिठाई खिलाना — पारंपरिक मीठा भोजन
- उपहार देना — भाई बहन को उपहार और शगुन देता है
- दीर्घायु की प्रार्थना — बहन भाई के दीर्घ जीवन की कामना करती है
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और कुमकुम रखें
- भगवान गणेश और कुलदेवता की पूजा करें
- भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठे
- बहन भाई के माथे पर तिलक लगाए, अक्षत चढ़ाए
- दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें और मंत्र पढ़ें
- आरती उतारें और मिठाई खिलाएं
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
- महाराष्ट्र — नारली पूर्णिमा (समुद्र देवता को नारियल अर्पण)
- पश्चिम बंगाल — झूलन यात्रा (राधा-कृष्ण की लीला)
- उत्तर भारत — कजरी पूर्णिमा (कृषि उत्सव के साथ)
- दक्षिण भारत — अवनी अवित्तम (जनेऊ बदलने का दिन)
- राजस्थान — रामी राखी और लूम्बा राखी (भाभी को)
क्या करें
- भद्रा काल का त्याग करें
- बड़ों का आशीर्वाद लें
- शुभ मुहूर्त में राखी बांधें
- स्वच्छ वस्त्र पहनें
- पारंपरिक रीति का पालन करें
क्या न करें
- भद्रा काल में राखी न बांधें
- सूर्यास्त के बाद बांधने से बचें (यदि शुभ मुहूर्त न हो)
- काले रंग की राखी से बचें
- टूटी हुई राखी का प्रयोग न करें
- क्रोध या विवाद से बचें