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|| श्रीमद्भगवद्गीता ||

विभूतियोग

Vibhuti Yog
दिव्य विभूतियों का योग
📜 42 श्लोक 📖 अध्याय 10
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 अध्याय सारांश

गीता का दसवाँ अध्याय 'विभूतियोग' भगवान के अनन्त ऐश्वर्य का वर्णन करता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि उनका आदि न देवता जानते हैं न महर्षि, क्योंकि वही सबके मूल कारण हैं। बुद्धि, ज्ञान, क्षमा, सत्य, सुख-दुःख — प्राणियों के सब भाव उन्हीं से उपजते हैं। अर्जुन उन्हें परम ब्रह्म मानकर उनकी विभूतियाँ विस्तार से सुनना चाहता है। उत्तर में भगवान अपनी 'विभूतियाँ' बताते हैं — आदित्यों में विष्णु, ज्योतियों में सूर्य, वेदों में सामवेद, इन्द्रियों में मन, पर्वतों में मेरु, नदियों में गंगा, पाण्डवों में अर्जुन... और अन्त में कहते हैं कि जो भी श्रेष्ठ, सुन्दर या शक्तिशाली है वह उनके तेज का एक अंश मात्र है — 'मैं एक अंश से ही सारे जगत को धारण किये हूँ'।

 Chapter Summary (English)

The tenth chapter, 'Vibhuti Yoga', describes the infinite glories of God. Krishna says that neither the gods nor the great sages know His origin, for He is the source of all. Intelligence, knowledge, forgiveness, truth, joy and sorrow — all the states of beings arise from Him. Recognizing Him as the supreme Brahman, Arjuna longs to hear His glories in detail. In reply, Krishna names His 'vibhutis' — among the Adityas, Vishnu; among lights, the sun; among the Vedas, the Sama Veda; among the senses, the mind; among mountains, Meru; among rivers, the Ganga; among the Pandavas, Arjuna — and concludes that whatever is glorious, beautiful or powerful is but a spark of His splendour: 'I support this entire universe with a single fraction of Myself.'

श्लोक

कुल 42 श्लोक

1 श्लोक 10.1
श्रीभगवानुवाच
भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः।
यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया।।1।।
हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे महाबाहो! एक बार फिर मेरे परम और प्रभावशाली वचन सुन, जो मैं तुझ प्रिय भक्त के हित की कामना से कहूँगा।

English Meaning

The Blessed Lord said: Hear once more, O mighty-armed, My supreme word, which I shall speak to you, who are dear to Me, for your welfare.

2 श्लोक 10.2
न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः।
अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः।।2।।
हिंदी अर्थ

मेरे प्रकट होने (उत्पत्ति) को न देवता जानते हैं न महर्षि; क्योंकि मैं हर प्रकार से देवताओं और महर्षियों का भी आदि-कारण हूँ।

English Meaning

Neither the hosts of gods nor the great sages know My origin; for I am the source of the gods and the great sages in every way.

3 श्लोक 10.3
यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम्।
असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते।।3।।
हिंदी अर्थ

जो मुझे अजन्मा, अनादि और लोकों का महान ईश्वर तत्त्व से जानता है, वह मनुष्यों में मोहरहित ज्ञानी सब पापों से मुक्त हो जाता है।

English Meaning

One who knows Me as unborn, beginningless and the great Lord of the worlds — that undeluded one among mortals is freed from all sins.

4-5 श्लोक 10.4 – 10.5
बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः।
सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च।।4।।
अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः।
भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः।।5।।
हिंदी अर्थ

बुद्धि, ज्ञान, मोह का अभाव, क्षमा, सत्य, इन्द्रिय-संयम, मन-निग्रह; सुख-दुःख, उत्पत्ति-विनाश, भय-अभय; तथा अहिंसा, समता, संतोष, तप, दान, यश और अपयश — प्राणियों के ये नाना भाव मुझसे ही उत्पन्न होते हैं।

English Meaning

Intelligence, knowledge, freedom from delusion, patience, truth, self-control, calmness; pleasure and pain, birth and death, fear and fearlessness; non-violence, equanimity, contentment, austerity, charity, fame and infamy — these varied states of beings arise from Me alone.

6 श्लोक 10.6
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा।
मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः।।6।।
हिंदी अर्थ

सात महर्षि, उनसे भी पहले के चार सनकादि, तथा (चौदह) मनु — ये सब मुझमें भाव रखने वाले मेरे संकल्प (मन) से उत्पन्न हुए हैं, जिनसे संसार की यह सारी प्रजा है।

English Meaning

The seven great sages, the four ancient ones before them, and the Manus — all sharing My nature — were born of My mind; from them came all the creatures of the world.

7 श्लोक 10.7
एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः।
सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः।।7।।
हिंदी अर्थ

जो मेरी इस विभूति (ऐश्वर्य) और योगशक्ति को तत्त्व से जानता है, वह अविचल भक्तियोग से युक्त हो जाता है — इसमें कोई संशय नहीं।

English Meaning

One who truly knows this glory and power of Mine becomes endowed with unshakable yoga; of this there is no doubt.

8 श्लोक 10.8
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते।
इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः।।8।।
हिंदी अर्थ

मैं ही सम्पूर्ण जगत का उद्गम हूँ और मुझसे ही सब चेष्टा करता है — ऐसा जानकर श्रद्धा-भाव से युक्त बुद्धिमान भक्त मुझे ही भजते हैं।

English Meaning

I am the origin of all; from Me everything proceeds. Knowing this, the wise, filled with devotion, worship Me.

9 श्लोक 10.9
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्।
कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च।।9।।
हिंदी अर्थ

मुझमें मन और प्राण लगाने वाले भक्त आपस में मेरे प्रभाव की चर्चा करते, मेरा कथन करते हुए निरन्तर संतुष्ट रहते और मुझमें ही रमण करते हैं।

English Meaning

With minds fixed on Me and lives surrendered to Me, enlightening one another and ever speaking of Me, they are content and rejoice.

10 श्लोक 10.10
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्।
ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते।।10।।
हिंदी अर्थ

उन निरन्तर मुझमें लगे, प्रेमपूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे वे मुझे ही प्राप्त होते हैं।

English Meaning

To those ever steadfast, worshipping Me with love, I give that yoga of understanding by which they come to Me.

11 श्लोक 10.11
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता।।11।।
हिंदी अर्थ

उन पर कृपा करने के लिए मैं उनके हृदय में स्थित होकर, प्रकाशमान ज्ञान-दीपक से उनके अज्ञानजनित अन्धकार को नष्ट कर देता हूँ।

English Meaning

Out of compassion for them, dwelling within their hearts, I destroy the darkness born of ignorance with the shining lamp of knowledge.

12-13 श्लोक 10.12 – 10.13
अर्जुन उवाच
परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान्।
पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम्।।12।।
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा।
असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे।।13।।
हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: आप परम ब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं। सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास आपको सनातन दिव्य पुरुष, देवों के भी आदिदेव, अजन्मा और सर्वव्यापी कहते हैं; और स्वयं आप भी मुझसे यही कहते हैं।

English Meaning

Arjuna said: You are the supreme Brahman, the supreme abode, the supremely pure. All the sages — the divine sage Narada, Asita, Devala and Vyasa — call You the eternal divine Person, the first of gods, unborn and all-pervading; and You Yourself tell me so.

14 श्लोक 10.14
सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव।
न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः।।14।।
हिंदी अर्थ

हे केशव! जो कुछ आप मुझसे कहते हैं, उसे मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन्! आपके प्रकट स्वरूप को न देवता जानते हैं न दानव।

English Meaning

I hold as true all that You tell me, O Keshava; neither the gods nor the demons, O Lord, know Your manifestation.

15 श्लोक 10.15
स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम।
भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते।।15।।
हिंदी अर्थ

हे पुरुषोत्तम! हे भूतों के उत्पत्ति-कर्ता! हे भूतों के ईश्वर! हे देवों के देव! हे जगत्पति! आप स्वयं ही अपने-आपको जानते हैं।

English Meaning

You alone know Yourself by Yourself, O Supreme Person, O source of beings, O Lord of beings, O God of gods, O ruler of the world.

16 श्लोक 10.16
वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः।
याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि।।16।।
हिंदी अर्थ

आप ही अपनी उन दिव्य विभूतियों को पूरी तरह कहने में समर्थ हैं, जिन विभूतियों से आप इन सब लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं।

English Meaning

You alone can fully describe Your divine glories, by which You pervade and abide in all these worlds.

17 श्लोक 10.17
कथं विद्यामहं योगिंस्त्वां सदा परिचिन्तयन्।
केषु केषु च भावेषु चिन्त्योऽसि भगवन्मया।।17।।
हिंदी अर्थ

हे योगेश्वर! निरन्तर चिन्तन करते हुए मैं आपको कैसे जानूँ? और हे भगवन्! किन-किन रूपों में मैं आपका चिन्तन करूँ?

English Meaning

How shall I know You, O Master of yoga, by constant meditation? In what forms, O Lord, are You to be thought of by me?

18 श्लोक 10.18
विस्तरेणात्मनो योगं विभूतिं च जनार्दन।
भूयः कथय तृप्तिर्हि शृण्वतो नास्ति मेऽमृतम्।।18।।
हिंदी अर्थ

हे जनार्दन! अपनी योगशक्ति और विभूति को फिर से विस्तार से कहिए; क्योंकि आपके अमृत-वचन सुनते हुए मेरी तृप्ति ही नहीं होती।

English Meaning

Tell me again in detail, O Janardana, of Your power and glory; for I am never satiated hearing Your nectar-like words.

19 श्लोक 10.19
श्रीभगवानुवाच
हन्त ते कथयिष्यामि दिव्या ह्यात्मविभूतयः।
प्राधान्यतः कुरुश्रेष्ठ नास्त्यन्तो विस्तरस्य मे।।19।।
हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे कुरुश्रेष्ठ! अच्छा, अब मैं अपनी प्रमुख दिव्य विभूतियाँ तुझे बताता हूँ; क्योंकि मेरे विस्तार का तो कोई अन्त ही नहीं।

English Meaning

The Blessed Lord said: So be it! I shall tell you My principal divine glories, O best of the Kurus; for there is no end to My extent.

20 श्लोक 10.20
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः।
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च।।20।।
हिंदी अर्थ

हे गुडाकेश! मैं सब प्राणियों के हृदय में स्थित उनका आत्मा हूँ; तथा सब भूतों का आदि, मध्य और अन्त भी मैं ही हूँ।

English Meaning

I am the Self, O Gudakesha, seated in the hearts of all beings; I am the beginning, the middle and the end of all beings.

21 श्लोक 10.21
आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान्।
मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी।।21।।
हिंदी अर्थ

आदित्यों में मैं विष्णु हूँ, ज्योतियों में किरणों वाला सूर्य हूँ, मरुद्गणों में मरीचि और नक्षत्रों में चन्द्रमा हूँ।

English Meaning

Among the Adityas I am Vishnu; among lights, the radiant sun; among the Maruts I am Marichi; among the stars I am the moon.

22 श्लोक 10.22
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः।
इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना।।22।।
हिंदी अर्थ

वेदों में मैं सामवेद हूँ, देवताओं में इन्द्र हूँ, इन्द्रियों में मन हूँ और प्राणियों में चेतना (जीवन-शक्ति) हूँ।

English Meaning

Among the Vedas I am the Sama Veda; among the gods I am Indra; among the senses I am the mind; in beings I am consciousness.

23 श्लोक 10.23
रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम्।
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम्।।23।।
हिंदी अर्थ

रुद्रों में मैं शंकर हूँ, यक्ष-राक्षसों में कुबेर हूँ, वसुओं में अग्नि हूँ और शिखरों वाले पर्वतों में सुमेरु हूँ।

English Meaning

Among the Rudras I am Shankara; among the yakshas and rakshasas, Kubera; among the Vasus I am fire; among mountain peaks I am Meru.

24 श्लोक 10.24
पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम्।
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः।।24।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! पुरोहितों में मुखिया बृहस्पति मुझे जान; सेनापतियों में मैं स्कन्द (कार्तिकेय) हूँ और जलाशयों में समुद्र हूँ।

English Meaning

Among priests, O Partha, know Me to be the chief, Brihaspati; among commanders I am Skanda; among bodies of water I am the ocean.

25 श्लोक 10.25
महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम्।
यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः।।25।।
हिंदी अर्थ

महर्षियों में मैं भृगु हूँ, वाणी में एक अक्षर ॐकार हूँ, यज्ञों में जप-यज्ञ हूँ और स्थिर वस्तुओं में हिमालय हूँ।

English Meaning

Among the great sages I am Bhrigu; among words I am the single syllable Om; among sacrifices I am the sacrifice of silent repetition; among immovable things, the Himalaya.

26 श्लोक 10.26
अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः।।26।।
हिंदी अर्थ

सब वृक्षों में मैं पीपल हूँ, देवर्षियों में नारद, गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ।

English Meaning

Among trees I am the peepal; among divine sages, Narada; among gandharvas, Chitraratha; among the perfected ones, the sage Kapila.

27 श्लोक 10.27
उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम्।
ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम्।।27।।
हिंदी अर्थ

घोड़ों में अमृत के साथ प्रकट हुआ उच्चैःश्रवा, श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत और मनुष्यों में राजा मुझे जान।

English Meaning

Among horses know Me as Uchchaihshravas, born of nectar; among lordly elephants, Airavata; among men, the king.

28 श्लोक 10.28
आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक्।
प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः।।28।।
हिंदी अर्थ

शस्त्रों में मैं वज्र हूँ, गौओं में कामधेनु हूँ, सन्तान-उत्पत्ति का हेतु कामदेव हूँ और सर्पों में वासुकि हूँ।

English Meaning

Among weapons I am the thunderbolt; among cows, the wish-fulfilling Kamadhenu; I am Kandarpa, the cause of progeny; among serpents, Vasuki.

29 श्लोक 10.29
अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम्।
पितॄणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम्।।29।।
हिंदी अर्थ

नागों में मैं शेषनाग हूँ, जलचरों के अधिपति वरुण हूँ, पितरों में अर्यमा हूँ और संयम (दण्ड) करने वालों में यमराज हूँ।

English Meaning

Among nagas I am Ananta; among water-beings, Varuna; among the ancestors, Aryaman; among controllers, Yama.

30 श्लोक 10.30
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम्।
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम्।।30।।
हिंदी अर्थ

दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ, गणना करने वालों में काल (समय) हूँ, पशुओं में सिंह और पक्षियों में गरुड़ हूँ।

English Meaning

Among the daityas I am Prahlada; among reckoners I am Time; among beasts I am the lion; among birds I am Garuda.

31 श्लोक 10.31
पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्।
झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी।।31।।
हिंदी अर्थ

पवित्र करने वालों में मैं वायु हूँ, शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ, मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्रीगंगा हूँ।

English Meaning

Among purifiers I am the wind; among warriors I am Rama; among fishes I am the crocodile; among rivers I am the Ganga.

32 श्लोक 10.32
सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन।
अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम्।।32।।
हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! सृष्टियों का आदि, मध्य और अन्त मैं ही हूँ; विद्याओं में अध्यात्म-विद्या और वाद-विवाद करने वालों का तत्त्व-निर्णायक वाद मैं हूँ।

English Meaning

Among creations I am the beginning, the middle and the end, O Arjuna; among sciences I am the science of the Self; among debaters I am right reasoning.

33 श्लोक 10.33
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च।
अहमेवाक्षयः कालो धाताहं विश्वतोमुखः।।33।।
हिंदी अर्थ

अक्षरों में मैं 'अ'कार हूँ और समासों में द्वन्द्व-समास हूँ; अक्षय काल (महाकाल) और सब ओर मुख वाला विराट-धाता भी मैं ही हूँ।

English Meaning

Among letters I am the letter A; among compounds I am the dual; I am inexhaustible Time, and the all-faced sustainer.

34 श्लोक 10.34
मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम्।
कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा।।34।।
हिंदी अर्थ

सबका हरण करने वाली मृत्यु और होने वालों की उत्पत्ति भी मैं हूँ; तथा स्त्री-गुणों में कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा मैं हूँ।

English Meaning

I am all-devouring death, and the origin of those yet to be; and among feminine qualities, fame, prosperity, speech, memory, intelligence, steadfastness and forgiveness.

35 श्लोक 10.35
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः।।35।।
हिंदी अर्थ

साम-मंत्रों में मैं बृहत्साम हूँ, छन्दों में गायत्री हूँ; महीनों में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में वसन्त मैं हूँ।

English Meaning

Among the Sama hymns I am the Brihatsama; among metres, the Gayatri; among months I am Margashirsha; among seasons, spring.

36 श्लोक 10.36
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्।
जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम्।।36।।
हिंदी अर्थ

छल करने वालों में मैं जुआ हूँ, तेजस्वियों का तेज हूँ; मैं विजय हूँ, निश्चय (उद्यम) हूँ और सात्त्विक पुरुषों का सत्त्व-भाव हूँ।

English Meaning

Among deceivers I am gambling; I am the splendour of the splendid; I am victory, I am resolve, and the goodness of the good.

37 श्लोक 10.37
वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनञ्जयः।
मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनामुशना कविः।।37।।
हिंदी अर्थ

वृष्णिवंशियों में मैं वासुदेव हूँ, पाण्डवों में अर्जुन (धनंजय) हूँ, मुनियों में व्यास और कवियों में शुक्राचार्य हूँ।

English Meaning

Among the Vrishnis I am Vasudeva; among the Pandavas, Arjuna; among sages I am Vyasa; among seers, the poet Ushanas.

38 श्लोक 10.38
दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम्।
मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम्।।38।।
हिंदी अर्थ

दमन करने वालों का दण्ड मैं हूँ, विजय चाहने वालों की नीति हूँ, गुप्त रखने योग्य भावों में मौन हूँ और ज्ञानियों का ज्ञान मैं हूँ।

English Meaning

Among punishers I am the rod of discipline; among those seeking victory, statesmanship; among secrets I am silence; and I am the knowledge of the knowers.

39 श्लोक 10.39
यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन।
न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम्।।39।।
हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! सब प्राणियों का जो बीज (मूल कारण) है, वह भी मैं ही हूँ; ऐसा कोई चर या अचर प्राणी नहीं जो मेरे बिना हो।

English Meaning

And whatever is the seed of all beings, that too am I, O Arjuna; there is nothing, moving or unmoving, that can exist without Me.

40 श्लोक 10.40
नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप।
एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया।।40।।
हिंदी अर्थ

हे परंतप! मेरी दिव्य विभूतियों का कोई अन्त नहीं; मैंने तो यह विभूति-विस्तार तुझे केवल संक्षेप में बताया है।

English Meaning

There is no end to My divine glories, O scorcher of foes; what I have told you is but a brief indication of My extent.

41 श्लोक 10.41
यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा।
तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसम्भवम्।।41।।
हिंदी अर्थ

जो भी वस्तु ऐश्वर्ययुक्त, कान्तियुक्त या शक्तियुक्त है, उसे तू मेरे ही तेज के एक अंश से प्रकट हुई जान।

English Meaning

Whatever being is glorious, beautiful or powerful — know that to spring from but a spark of My splendour.

42 श्लोक 10.42
अथवा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन।
विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत्।।42।।
हिंदी अर्थ

अथवा हे अर्जुन! इतना विस्तार से जानने की क्या आवश्यकता? मैं अपनी योगशक्ति के एक ही अंश से इस सम्पूर्ण जगत को धारण करके स्थित हूँ।

English Meaning

But what need have you of all this detailed knowledge, O Arjuna? I stand supporting this entire universe with but a single fraction of Myself.

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