अयोध्या — भगवान श्रीराम की पावन जन्मभूमि और सनातन धर्म की सात पवित्र पुरियों (सप्तपुरियों) में से एक। उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर बसी यह नगरी रामायण की मूल भूमि है, जहाँ राजा दशरथ ने अपनी राजधानी स्थापित की थी और जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ।

22 जनवरी 2024 को राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ — सदियों की प्रतीक्षा के बाद रामलला अपने नवनिर्मित दिव्य मंदिर में विराजमान हुए। आज अयोध्या केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि हिंदू आस्था का प्राण-केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु राम लला के दर्शन और सरयू स्नान के लिए आते हैं।

मुख्य जानकारी

  • प्रमुख देवता: भगवान श्रीराम (रामलला)
  • स्थान: अयोध्या, उत्तर प्रदेश
  • नदी: सरयू नदी
  • प्राण प्रतिष्ठा: 22 जनवरी 2024
  • श्रेणी: सप्तपुरियों में से एक
  • सर्वोत्तम समय: अक्टूबर–मार्च

दर्शन समय

🌅 प्रातः दर्शन
07:00 AM – 11:30 AM
🌇 सायं दर्शन
02:00 PM – 07:00 PM
मंदिर 11:30 AM – 02:00 PM तक बंद रहता है (भोग व विश्राम काल)
नई दिल्ली से दूरी
सड़क मार्ग
685 km
यात्रा समय
11-13 घंटे
हवाई मार्ग से
1.5 घंटे

निःशुल्क आरती दर्शन समय

राम मंदिर में दिन में तीन प्रमुख आरतियाँ की जाती हैं। श्रद्धालु इन समयों पर निःशुल्क आरती दर्शन का लाभ ले सकते हैं — परंतु पूर्व पंजीकरण आवश्यक होता है।

🌅 मंगला आरती
04:00 AM (ब्रह्म मुहूर्त)
🌞 श्रृंगार आरती
06:00 AM
🌙 शयन आरती
10:00 PM (रात्रि विश्राम)
🎉 विशेष आरती
त्योहारों पर अतिरिक्त
ℹ️ आरती दर्शन के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर निःशुल्क पास बुक करें।

मंदिर का इतिहास — एक संक्षिप्त यात्रा

राम जन्मभूमि का इतिहास हज़ारों वर्षों की धार्मिक श्रद्धा और सदियों के संघर्ष की कहानी है। यहाँ एक संक्षिप्त समयरेखा दी गई है —

त्रेता युग

रामायण के अनुसार, अयोध्या नगरी की स्थापना मनु के पुत्र महाराज इक्ष्वाकु ने की थी। आगे चलकर सूर्यवंशी राजा दशरथ ने इसे अपनी राजधानी बनाया, और यहीं भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में अवतार लिया।

प्राचीन काल

विभिन्न युगों में अयोध्या मौर्य, गुप्त, और कन्नौज के राजपूत राजवंशों के अधीन रही। प्रत्येक काल में इस नगरी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बना रहा। यहाँ अनेक राम मंदिर निर्मित और पुनर्निर्मित होते रहे।

1528 ई.

मुगल आक्रमणकारी बाबर के सेनापति मीर बाक़ी ने राम जन्मभूमि पर स्थित प्राचीन राम मंदिर को ध्वस्त करवा कर वहाँ एक मस्जिद का निर्माण किया, जिसे बाद में "बाबरी मस्जिद" कहा गया। यह घटना सनातन धर्म के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय बन गई।

1853–1949

शताब्दियों तक हिंदू समाज ने राम जन्मभूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए अनेक संघर्ष किए। 1949 में रामलला की मूर्ति विवादित ढाँचे के भीतर प्रकट हुई, और तभी से वहाँ नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ हो गई।

1980 के दशक

विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों के नेतृत्व में "राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन" ने राष्ट्रव्यापी रूप धारण कर लिया। लाखों रामभक्त एकजुट होकर मंदिर निर्माण की माँग करने लगे।

6 दिसंबर 1992

राम भक्तों और कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया। यह घटना देश-विदेश में चर्चा का विषय बनी और इसके बाद कानूनी प्रक्रिया एक नए मोड़ पर पहुँच गई।

1992–2019

लगभग तीन दशकों तक यह मामला विभिन्न अदालतों में चलता रहा। साक्ष्य, पुरातात्विक प्रमाण (ASI रिपोर्ट) और ऐतिहासिक तथ्य प्रस्तुत किए गए। अंततः मामला सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के समक्ष पहुँचा।

9 नवंबर 2019

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने ऐतिहासिक एकमत निर्णय सुनाया — विवादित 2.77 एकड़ की पूरी भूमि राम लला विराजमान को प्रदान की गई। न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और मस्जिद के लिए अलग 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया।

5 अगस्त 2020

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से राम मंदिर का भूमि पूजन और शिलान्यास संपन्न हुआ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नेतृत्व में भव्य मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ।

22 जनवरी 2024

ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह! सदियों की प्रतीक्षा के बाद रामलला अपने दिव्य और भव्य नूतन मंदिर में विराजमान हुए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने मुख्य यजमान के रूप में प्रतिष्ठा अनुष्ठान संपन्न किया। पूरा देश राममय हो उठा और दीप जलाकर "श्रीराम जय राम जय जय राम" का जयघोष किया।

कैसे पहुँचें

अयोध्या आज देश के सबसे सुगम तीर्थस्थलों में से एक है। हवाई, रेल और सड़क — तीनों मार्गों से उत्तम कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

हवाई मार्ग
महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या (≈10 km) — दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु सहित प्रमुख शहरों से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग
अयोध्या जंक्शन (अब "अयोध्या धाम") देश भर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कई विशेष ट्रेनें चलती हैं।
सड़क मार्ग
लखनऊ (135 km), गोरखपुर (140 km), वाराणसी (200 km) और प्रयागराज (170 km) से राष्ट्रीय व राज्य मार्गों के माध्यम से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी। नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं।

मंदिर का स्थान

श्री राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या का सटीक स्थान — मानचित्र पर ज़ूम करें या नेविगेशन के लिए Google Maps में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर के दर्शन कब होते हैं?

राम मंदिर के दर्शन प्रातः 07:00 बजे से 11:30 बजे तक और सायं 02:00 बजे से 07:00 बजे तक होते हैं। 11:30 AM से 02:00 PM तक मंदिर भोग और विश्राम के लिए बंद रहता है। त्योहारों पर समय में बदलाव हो सकता है।

आरती के लिए पास कैसे बुक करें?

मंगला, श्रृंगार और शयन आरती में सम्मिलित होने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट (srjbtkshetra.org) पर निःशुल्क पास बुक करना अनिवार्य है। पास सीमित संख्या में जारी होते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग करना उचित है।

क्या मंदिर में मोबाइल और कैमरा ले जा सकते हैं?

मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा, पर्स, बेल्ट और चमड़े की वस्तुएँ ले जाना पूर्णतः निषिद्ध है। मंदिर के बाहर निःशुल्क लॉकर/क्लोक रूम सुविधा उपलब्ध है जहाँ अपनी वस्तुएँ सुरक्षित रखी जा सकती हैं।

दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय कब है?

अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है — मौसम सुहावना रहता है। राम नवमी, दीवाली और 22 जनवरी (प्राण प्रतिष्ठा दिवस) पर विशेष भव्यता होती है, परंतु भीड़ भी बहुत अधिक होती है। साधारण दिनों में दर्शन शांति से किए जा सकते हैं।

क्या ड्रेस कोड है?

राम मंदिर में कोई सख्त ड्रेस कोड नहीं है, परंतु शालीन और पारंपरिक भारतीय वस्त्र पहनना सम्मानजनक माना जाता है। पुरुष कुर्ता-पायजामा/धोती तथा महिलाएँ साड़ी/सलवार-कमीज पहनें। छोटे कपड़े पहनकर मंदिर में न जाएँ।

अयोध्या में दर्शन के अलावा कौन से प्रमुख स्थल हैं?

अयोध्या में कई प्रमुख तीर्थ स्थल हैं — हनुमान गढ़ी (हनुमान जी का मंदिर), कनक भवन (माता सीता का महल), राम की पैड़ी (सरयू स्नान घाट), नागेश्वरनाथ मंदिर, तुलसी स्मारक भवन और दशरथ महल। सभी मंदिर निकट हैं और एक दिन में दर्शन हो जाते हैं।

मंदिर में दर्शन के लिए कितना समय लगता है?

सामान्य दिनों में दर्शन में 1-2 घंटे लग सकते हैं, जबकि त्योहारों या वीकेंड पर 3-5 घंटे लग सकते हैं। आरती पास होने पर अलग लाइन से शीघ्र दर्शन होते हैं। मंदिर परिसर बड़ा है — पूरी यात्रा के लिए 2-3 घंटे रखें।

क्या अयोध्या में अच्छे होटल और धर्मशालाएँ हैं?

हाँ, अयोध्या में बजट से लेकर लक्जरी होटल तक सब उपलब्ध हैं। राम जन्मभूमि के पास अनेक धर्मशालाएँ और गेस्ट हाउस हैं। त्योहारों और सप्ताहांत में अग्रिम बुकिंग आवश्यक है। MakeMyTrip, Booking.com और IRCTC पर ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है।

क्या वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा है?

हाँ, राम मंदिर ट्रस्ट ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की है — व्हीलचेयर, अलग प्रवेश द्वार और प्राथमिकता दर्शन उपलब्ध हैं। मंदिर परिसर रैम्प और एस्केलेटर से सुसज्जित है।

क्या प्रसाद और भोग मिलते हैं?

हाँ, मंदिर परिसर में भगवान को अर्पित प्रसाद वितरित किया जाता है — प्रमुख रूप से इलायची दाना और सूखे मेवे। प्रसाद को बहुत पवित्र माना जाता है और भक्तजन इसे घर ले जाकर परिवार में बाँटते हैं।

राम मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण है या अभी जारी है?

22 जनवरी 2024 को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ — यानी गर्भगृह तैयार है और दर्शन शुरू हो चुके हैं। परंतु पूरे मंदिर परिसर (मंडप, परकोटा, अन्य देव-मंदिर, संग्रहालय) का निर्माण कार्य अभी भी चरणबद्ध रूप से जारी है, जो 2025-26 तक पूर्ण होने की संभावना है।

क्या अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुविधा है?

हाँ, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या में संचालित है। विदेशी श्रद्धालुओं के लिए वैध पासपोर्ट और वीज़ा आवश्यक है। मंदिर में किसी भी राष्ट्रीयता के भक्त को दर्शन की अनुमति है। मंदिर परिसर में अंग्रेज़ी संकेत भी उपलब्ध हैं।

आधिकारिक वेबसाइट

आरती पास बुकिंग, दर्शन सूचना और लाइव अपडेट के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

srjbtkshetra.org