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|| श्रीमद्भगवद्गीता ||

मोक्षसंन्यासयोग

Moksha Sanyas Yog
मोक्ष और संन्यास का योग
📜 78 श्लोक 📖 अध्याय 18
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 अध्याय सारांश

गीता का अठारहवाँ और अन्तिम अध्याय 'मोक्षसंन्यासयोग' पूरे ग्रन्थ का सार-संग्रह है। अर्जुन के 'संन्यास' और 'त्याग' के भेद पूछने पर श्रीकृष्ण समझाते हैं कि कर्म छोड़ना नहीं, बल्कि फल की आसक्ति छोड़ना ही सच्चा त्याग है। फिर वे गुणों के अनुसार त्याग, ज्ञान, कर्म, कर्ता, बुद्धि, धृति और सुख — सबके तीन-तीन प्रकार बताते हैं, और स्वभाव-अनुसार वर्ण-धर्म समझाकर कहते हैं कि 'अपना धर्म, गुणरहित भी, पराये से श्रेष्ठ है'। अध्याय का शिखर है गीता का परम वचन — 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' (सब छोड़कर केवल मेरी शरण में आ, मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूँगा)। अर्जुन का मोह नष्ट हो जाता है और वह कहता है 'करिष्ये वचनं तव' (मैं आपकी आज्ञा का पालन करूँगा)। संजय के इस घोषणा से गीता समाप्त होती है — 'जहाँ कृष्ण और अर्जुन हैं, वहीं विजय और कल्याण है'।

 Chapter Summary (English)

The eighteenth and final chapter, 'Moksha-Sannyasa Yoga', is the grand summary of the whole Gita. When Arjuna asks the difference between 'renunciation' and 'relinquishment', Krishna explains that true relinquishment is not giving up action but giving up attachment to its fruit. He then classifies relinquishment, knowledge, action, the doer, intellect, firmness and happiness — each into three types by the gunas — and, explaining duty according to one's nature, declares that 'one's own duty, even if imperfect, is better than another's'. The summit of the chapter is the Gita's supreme word — 'Abandon all duties and take refuge in Me alone; I shall free you from all sins.' Arjuna's delusion is destroyed and he says, 'I shall do Your word.' The Gita ends with Sanjaya's declaration — 'Wherever Krishna and Arjuna are, there are victory and well-being.'

श्लोक

कुल 78 श्लोक

1 श्लोक 18.1
अर्जुन उवाच
संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्।
त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन।।1।।
हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे महाबाहो! हे हृषीकेश! हे केशिनिषूदन! मैं संन्यास और त्याग के तत्त्व को अलग-अलग जानना चाहता हूँ।

English Meaning

Arjuna said: O mighty-armed, O Hrishikesha, O slayer of Keshi, I wish to know the truth of renunciation (sannyasa) and of relinquishment (tyaga), each distinctly.

2 श्लोक 18.2
श्रीभगवानुवाच
काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः।
सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः।।2।।
हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: कुछ विद्वान काम्य कर्मों के त्याग को 'संन्यास' कहते हैं, और कुछ विचारशील सब कर्मों के फल के त्याग को 'त्याग' कहते हैं।

English Meaning

The Blessed Lord said: The sages understand renunciation to be the giving up of desire-prompted actions; the wise call the relinquishment of the fruit of all actions 'tyaga'.

3 श्लोक 18.3
त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः।
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे।।3।।
हिंदी अर्थ

कुछ विद्वान कहते हैं कि सब कर्म दोषयुक्त हैं, इसलिए त्याज्य हैं; और कुछ कहते हैं कि यज्ञ, दान और तप-रूप कर्म त्याज्य नहीं हैं।

English Meaning

Some thinkers say that all action should be given up as evil; others say that acts of sacrifice, charity and austerity should not be relinquished.

4 श्लोक 18.4
निश्चयं शृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम।
त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः सम्प्रकीर्तितः।।4।।
हिंदी अर्थ

हे पुरुषश्रेष्ठ! त्याग के विषय में मेरा निश्चय सुन; क्योंकि त्याग तीन प्रकार का — सात्त्विक, राजस और तामस — कहा गया है।

English Meaning

Hear My conclusion about relinquishment, O best of men; for relinquishment, O tiger among men, is declared to be of three kinds.

5 श्लोक 18.5
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्।
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्।।5।।
हिंदी अर्थ

यज्ञ, दान और तप-रूप कर्म त्याज्य नहीं, बल्कि अवश्य करने योग्य हैं; क्योंकि ये बुद्धिमानों को भी पवित्र करते हैं।

English Meaning

Acts of sacrifice, charity and austerity should not be given up, but should indeed be performed; for sacrifice, charity and austerity purify the wise.

6 श्लोक 18.6
एतान्यपि तु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा फलानि च।
कर्तव्यानीति मे पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम्।।6।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! इन कर्मों को भी, तथा अन्य सब कर्तव्य-कर्मों को, आसक्ति और फल छोड़कर करना चाहिए — यह मेरा निश्चित और उत्तम मत है।

English Meaning

But even these actions should be done giving up attachment and the fruits, O Partha; this is My firm and supreme conviction.

7 श्लोक 18.7
नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते।
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः।।7।।
हिंदी अर्थ

नियत (कर्तव्य) कर्म का त्याग उचित नहीं; उसका मोहवश त्याग कर देना तामस त्याग कहलाता है।

English Meaning

The renunciation of a prescribed duty is not proper; its abandonment through delusion is declared to be tamasic.

8 श्लोक 18.8
दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्।
स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्।।8।।
हिंदी अर्थ

'सब कर्म दुःखरूप हैं' मानकर जो शारीरिक कष्ट के भय से कर्तव्य-कर्म त्याग देता है, वह राजस त्याग करके त्याग का फल नहीं पाता।

English Meaning

One who gives up duty merely because it is troublesome, from fear of bodily pain, performs a rajasic relinquishment and gains none of its fruit.

9 श्लोक 18.9
कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन।
सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः।।9।।
हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! 'यह करना कर्तव्य है' मानकर, आसक्ति और फल छोड़कर जो नियत कर्म किया जाता है, वही सात्त्विक त्याग माना गया है।

English Meaning

When prescribed duty is done because it ought to be done, O Arjuna, giving up attachment and fruit — that is held to be sattvic relinquishment.

10 श्लोक 18.10
न द्वेष्ट्यकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते।
त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः।।10।।
हिंदी अर्थ

जो अकुशल (अप्रिय) कर्म से द्वेष नहीं करता और कुशल (प्रिय) कर्म में आसक्त नहीं होता, वह सत्त्व-युक्त, संशयरहित, बुद्धिमान सच्चा त्यागी है।

English Meaning

The wise relinquisher, full of goodness and free from doubt, neither hates disagreeable work nor clings to agreeable work.

11 श्लोक 18.11
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः।
यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते।।11।।
हिंदी अर्थ

शरीरधारी के लिए सब कर्मों का पूर्ण त्याग संभव नहीं; इसलिए जो कर्मफल का त्यागी है, वही (सच्चा) त्यागी कहलाता है।

English Meaning

It is indeed impossible for an embodied being to give up actions entirely; but one who relinquishes the fruit of action is called a true relinquisher.

12 श्लोक 18.12
अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मणः फलम्।
भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु संन्यासिनां क्वचित्।।12।।
हिंदी अर्थ

कर्मफल का त्याग न करने वालों को मरने के बाद अच्छा, बुरा और मिला-जुला — तीन प्रकार का फल मिलता है; पर त्यागियों को कभी नहीं मिलता।

English Meaning

For those who have not relinquished, the threefold fruit of action — pleasant, unpleasant and mixed — accrues after death; but never for the renouncers.

13 श्लोक 18.13
पञ्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध मे।
साङ्ख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम्।।13।।
हिंदी अर्थ

हे महाबाहो! सब कर्मों की सिद्धि के लिए सांख्य-शास्त्र में जो पाँच कारण कहे गये हैं, उन्हें मुझसे जान।

English Meaning

Learn from Me, O mighty-armed, the five factors declared in the Sankhya for the accomplishment of all actions.

14 श्लोक 18.14
अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्।
विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम्।।14।।
हिंदी अर्थ

अधिष्ठान (शरीर), कर्ता, भिन्न-भिन्न करण (इन्द्रियाँ), नाना प्रकार की चेष्टाएँ, और पाँचवाँ — दैव (प्रारब्ध) — ये पाँच कारण हैं।

English Meaning

The body, the doer, the various instruments, the many kinds of efforts, and divine providence as the fifth — these are the five factors.

15 श्लोक 18.15
शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नरः।
न्याय्यं वा विपरीतं वा पञ्चैते तस्य हेतवः।।15।।
हिंदी अर्थ

मनुष्य मन, वाणी और शरीर से जो भी शास्त्र-अनुकूल या विपरीत कर्म करता है, उसके ये ही पाँच कारण होते हैं।

English Meaning

Whatever action a man performs with body, speech or mind, whether right or wrong, these five are its causes.

16 श्लोक 18.16
तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः।
पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः।।16।।
हिंदी अर्थ

फिर भी जो अशुद्ध बुद्धि के कारण केवल शुद्ध आत्मा को ही कर्ता मानता है, वह मलिन-बुद्धि अज्ञानी ठीक नहीं देखता।

English Meaning

This being so, one who, through an untrained mind, looks upon the pure Self alone as the doer — that man of perverse mind does not see truly.

17 श्लोक 18.17
यस्य नाहङ्कृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते।
हत्वापि स इमाँल्लोकान्न हन्ति न निबध्यते।।17।।
हिंदी अर्थ

जिसमें 'मैं कर्ता हूँ' का भाव नहीं और जिसकी बुद्धि लिप्त नहीं होती, वह इन सब लोगों को मारकर भी न मारता है, न बँधता है।

English Meaning

One who is free from the notion of 'I am the doer', whose intellect is not tainted — though he slays these people, he neither slays nor is bound.

18 श्लोक 18.18
ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना।
करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसङ्ग्रहः।।18।।
हिंदी अर्थ

ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता — ये तीन कर्म की प्रेरणा हैं; और करण, कर्म तथा कर्ता — ये तीन कर्म-संग्रह हैं।

English Meaning

Knowledge, the object of knowledge and the knower — these three impel action; the instrument, the act and the doer — these three are the components of action.

19 श्लोक 18.19
ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः।
प्रोच्यते गुणसङ्ख्याने यथावच्छृणु तान्यपि।।19।।
हिंदी अर्थ

सांख्य-शास्त्र में ज्ञान, कर्म और कर्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के कहे गये हैं; उन्हें भी सुन।

English Meaning

Knowledge, action and the doer are said, in the science of the gunas, to be of three kinds each, according to the distinction of the gunas; hear of these too.

20 श्लोक 18.20
सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते।
अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्।।20।।
हिंदी अर्थ

जिस ज्ञान से मनुष्य सब भिन्न प्राणियों में एक अविनाशी, अविभक्त परमात्म-भाव को समभाव से देखता है, उसे सात्त्विक ज्ञान जान।

English Meaning

That knowledge by which one sees the one imperishable Being in all beings, undivided in the divided — know that knowledge to be sattvic.

21 श्लोक 18.21
पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान्।
वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम्।।21।।
हिंदी अर्थ

जिस ज्ञान से मनुष्य सब प्राणियों में अलग-अलग नाना भावों को पृथक देखता है, उसे राजस ज्ञान जान।

English Meaning

But the knowledge that sees in all beings manifold entities of different kinds, as separate — know that knowledge to be rajasic.

22 श्लोक 18.22
यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम्।
अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम्।।22।।
हिंदी अर्थ

जो ज्ञान एक ही (शरीर-रूप) कार्य में ही सब-कुछ मानकर आसक्त है, जो युक्तिहीन, तत्त्व-रहित और तुच्छ है, वह तामस कहलाता है।

English Meaning

But that which clings to a single effect as if it were the whole, without reason, not grasping the truth, and trivial — that is declared to be tamasic.

23 श्लोक 18.23
नियतं सङ्गरहितमरागद्वेषतः कृतम्।
अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते।।23।।
हिंदी अर्थ

जो कर्म शास्त्र-विधि से नियत, कर्तापन के अभिमान से रहित, और फल न चाहने वाले द्वारा राग-द्वेष बिना किया जाता है, वह सात्त्विक कहलाता है।

English Meaning

That action which is prescribed, free from attachment, done without love or hatred by one who seeks no fruit — that is called sattvic.

24 श्लोक 18.24
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः।
क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम्।।24।।
हिंदी अर्थ

किन्तु जो कर्म बहुत परिश्रम से, भोग चाहने वाले या अहंकारी द्वारा किया जाता है, वह राजस कहलाता है।

English Meaning

But the action done with great effort by one seeking to gratify desires, or done with egoism — that is called rajasic.

25 श्लोक 18.25
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्।
मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते।।25।।
हिंदी अर्थ

जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्य का विचार किये बिना, केवल मोह से आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहलाता है।

English Meaning

The action undertaken through delusion, without regard to consequences, loss, injury or one's own ability — that is called tamasic.

26 श्लोक 18.26
मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः।
सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते।।26।।
हिंदी अर्थ

जो कर्ता आसक्ति-रहित, अहंकार के वचन न बोलने वाला, धैर्य और उत्साह से युक्त, तथा सफलता-असफलता में निर्विकार है, वह सात्त्विक कहलाता है।

English Meaning

The doer who is free from attachment, unegoistic, endowed with firmness and zeal, and unaffected by success or failure — he is called sattvic.

27 श्लोक 18.27
रागी कर्मफलप्रेप्सुर्लुब्धो हिंसात्मकोऽशुचिः।
हर्षशोकान्वितः कर्ता राजसः परिकीर्तितः।।27।।
हिंदी अर्थ

जो कर्ता आसक्त, फल चाहने वाला, लोभी, हिंसक स्वभाव वाला, अशुद्ध और हर्ष-शोक से भरा है, वह राजस कहलाता है।

English Meaning

The doer who is passionate, seeking the fruit of action, greedy, violent, impure and moved by joy and grief — he is called rajasic.

28 श्लोक 18.28
अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः।
विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते।।28।।
हिंदी अर्थ

जो कर्ता असंयमी, असभ्य, हठी, धूर्त, दूसरों की जीविका नष्ट करने वाला, आलसी, विषादी और टालमटोल करने वाला है, वह तामस कहलाता है।

English Meaning

The doer who is unsteady, vulgar, stubborn, deceitful, malicious, lazy, despondent and procrastinating — he is called tamasic.

29 श्लोक 18.29
बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु।
प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय।।29।।
हिंदी अर्थ

हे धनंजय! अब बुद्धि और धृति के भी गुणों के अनुसार तीन-तीन भेद, अलग-अलग और पूरी तरह कहे जाते हैं — सुन।

English Meaning

Now hear, O Dhananjaya, the threefold division of intellect and of firmness, according to the gunas, declared fully and distinctly.

30 श्लोक 18.30
प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये।
बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी।।30।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जो बुद्धि प्रवृत्ति-निवृत्ति, कर्तव्य-अकर्तव्य, भय-अभय, और बन्धन-मोक्ष को यथार्थ जानती है, वह सात्त्विकी है।

English Meaning

The intellect that knows action and inaction, what should and should not be done, fear and fearlessness, bondage and liberation — that intellect, O Partha, is sattvic.

31 श्लोक 18.31
यया धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च।
अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी।।31।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जिस बुद्धि से मनुष्य धर्म-अधर्म और कर्तव्य-अकर्तव्य को ठीक से नहीं जानता, वह राजसी है।

English Meaning

That by which one wrongly grasps dharma and adharma, what should and should not be done — that intellect, O Partha, is rajasic.

32 श्लोक 18.32
अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता।
सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी।।32।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जो तमोगुण से ढकी बुद्धि अधर्म को धर्म मान लेती है और सब बातों को उल्टा समझती है, वह तामसी है।

English Meaning

That which, enveloped in darkness, regards adharma as dharma and sees all things in a perverted way — that intellect, O Partha, is tamasic.

33 श्लोक 18.33
धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः।
योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी।।33।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जिस अव्यभिचारिणी धृति (धारण-शक्ति) से मनुष्य ध्यानयोग द्वारा मन, प्राण और इन्द्रियों की क्रियाओं को धारण करता है, वह सात्त्विकी है।

English Meaning

The unwavering firmness by which one holds the activities of mind, life-breath and senses through yoga — that firmness, O Partha, is sattvic.

34 श्लोक 18.34
यया तु धर्मकामार्थान्धृत्या धारयतेऽर्जुन।
प्रसङ्गेन फलाकाङ्क्षी धृतिः सा पार्थ राजसी।।34।।
हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! फल चाहने वाला मनुष्य जिस धृति से अत्यन्त आसक्ति से धर्म, अर्थ और काम को धारण करता है, वह राजसी है।

English Meaning

But the firmness by which one holds to duty, wealth and pleasure with attachment, desiring their fruits, O Arjuna — that firmness is rajasic.

35 श्लोक 18.35
यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च।
न विमुञ्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी।।35।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! दुर्बुद्धि मनुष्य जिस धृति से निद्रा, भय, चिन्ता, विषाद और मद को नहीं छोड़ता (पकड़े रहता है), वह तामसी है।

English Meaning

That firmness by which a dull-witted person does not give up sleep, fear, grief, despair and conceit — that firmness, O Partha, is tamasic.

36-37 श्लोक 18.36 – 18.37
सुखं त्विदानीं त्रिविधं शृणु मे भरतर्षभ।
अभ्यासाद्रमते यत्र दुःखान्तं च निगच्छति।।36।।
यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्।
तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम्।।37।।
हिंदी अर्थ

हे भरतश्रेष्ठ! अब तीन प्रकार के सुख को भी सुन। जिस सुख में साधक अभ्यास से रमता है और दुःखों के अन्त को पाता है — जो आरम्भ में विष-सा पर परिणाम में अमृत-सा है, वह आत्म-बुद्धि की निर्मलता से उत्पन्न सुख सात्त्विक कहलाता है।

English Meaning

Now hear from Me, O best of the Bharatas, of the threefold happiness. That in which one rejoices through practice and reaches the end of sorrow; which is like poison at first but like nectar in the end, born of the serenity of one's own mind — that happiness is called sattvic.

38 श्लोक 18.38
विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम्।
परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम्।।38।।
हिंदी अर्थ

जो सुख विषय और इन्द्रियों के संयोग से होता है, जो आरम्भ में अमृत-सा पर परिणाम में विष-सा है, वह राजस कहलाता है।

English Meaning

The happiness arising from the contact of the senses with their objects, which is like nectar at first but like poison in the end — that is declared to be rajasic.

39 श्लोक 18.39
यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः।
निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम्।।39।।
हिंदी अर्थ

जो सुख आरम्भ में और परिणाम में भी आत्मा को मोहित करता है, और निद्रा, आलस्य व प्रमाद से उत्पन्न होता है, वह तामस कहलाता है।

English Meaning

That happiness which deludes the self both at the beginning and in the end, arising from sleep, sloth and heedlessness — that is declared to be tamasic.

40 श्लोक 18.40
न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा पुनः।
सत्त्वं प्रकृतिजैर्मुक्तं यदेभिः स्यात्त्रिभिर्गुणैः।।40।।
हिंदी अर्थ

पृथ्वी पर, स्वर्ग में या देवताओं में — कहीं भी ऐसा कोई प्राणी नहीं जो प्रकृति से उत्पन्न इन तीनों गुणों से रहित हो।

English Meaning

There is no being on earth, or among the gods in heaven, that is free from these three gunas born of nature.

41 श्लोक 18.41
ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप।
कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः।।41।।
हिंदी अर्थ

हे परंतप! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र — इन सबके कर्म स्वभाव से उत्पन्न गुणों के अनुसार बाँटे गये हैं।

English Meaning

The duties of Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras, O scorcher of foes, are distributed according to the qualities born of their own nature.

42 श्लोक 18.42
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।
ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।।42।।
हिंदी अर्थ

मन-इन्द्रिय का संयम, तप, शुद्धि, क्षमा, सरलता, ज्ञान, विज्ञान (अनुभव) और आस्तिकता — ये ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म हैं।

English Meaning

Calmness, self-control, austerity, purity, patience, uprightness, knowledge, realization and faith in God — these are the natural duties of the Brahmin.

43 श्लोक 18.43
शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्।
दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।।43।।
हिंदी अर्थ

शौर्य, तेज, धैर्य, चतुरता, युद्ध में न भागना, दान और स्वामी-भाव (नेतृत्व) — ये क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं।

English Meaning

Heroism, vigour, firmness, skill, not fleeing in battle, generosity and leadership — these are the natural duties of the Kshatriya.

44 श्लोक 18.44
कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम्।
परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम्।।44।।
हिंदी अर्थ

खेती, गौ-पालन और व्यापार — ये वैश्य के स्वाभाविक कर्म हैं; और सेवा करना शूद्र का स्वाभाविक कर्म है।

English Meaning

Agriculture, cattle-rearing and trade are the natural duties of the Vaishya; and service is the natural duty of the Shudra.

45 श्लोक 18.45
स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।
स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।।45।।
हिंदी अर्थ

अपने-अपने स्वाभाविक कर्म में तत्पर मनुष्य परम सिद्धि पा लेता है। अपने कर्म में लगा हुआ मनुष्य जैसे सिद्धि पाता है, वह सुन।

English Meaning

Devoted each to his own duty, a man attains perfection. Hear now how one engaged in his own duty attains perfection.

46 श्लोक 18.46
यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।
स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः।।46।।
हिंदी अर्थ

जिस परमेश्वर से सब प्राणियों की उत्पत्ति हुई और जिससे यह सब जगत व्याप्त है, उसी की अपने स्वाभाविक कर्म से पूजा करके मनुष्य परम सिद्धि पाता है।

English Meaning

Worshipping, through his own duty, Him from whom all beings arise and by whom all this is pervaded — a man attains perfection.

47 श्लोक 18.47
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।।47।।
हिंदी अर्थ

अच्छी तरह किये गये पराये धर्म से अपना गुणरहित धर्म भी श्रेष्ठ है; स्वभाव-नियत अपना कर्म करते हुए मनुष्य पाप को नहीं प्राप्त होता।

English Meaning

Better is one's own duty, though imperfect, than the duty of another well performed; doing the duty ordained by one's own nature, one incurs no sin.

48 श्लोक 18.48
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।
सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः।।48।।
हिंदी अर्थ

हे कौन्तेय! दोषयुक्त होने पर भी अपना स्वाभाविक कर्म नहीं छोड़ना चाहिए; क्योंकि जैसे अग्नि धुएँ से, वैसे सब कर्म किसी न किसी दोष से ढके रहते हैं।

English Meaning

One should not give up the duty to which one is born, O son of Kunti, even though it has defects; for all undertakings are clouded by defects, as fire by smoke.

49 श्लोक 18.49
असक्तबुद्धिः सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृहः।
नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां संन्यासेनाधिगच्छति।।49।।
हिंदी अर्थ

जिसकी बुद्धि सर्वत्र आसक्ति-रहित है, जो जितात्मा और इच्छा-रहित है, वह संन्यास द्वारा परम नैष्कर्म्य-सिद्धि को प्राप्त होता है।

English Meaning

One whose intellect is unattached everywhere, who has conquered himself and is free from longing, attains through renunciation the supreme perfection of actionlessness.

50 श्लोक 18.50
सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे।
समासेनैव कौन्तेय निष्ठा ज्ञानस्य या परा।।50।।
हिंदी अर्थ

हे कौन्तेय! जो ज्ञान की परा-निष्ठा है, उस नैष्कर्म्य-सिद्धि को पाकर मनुष्य जैसे ब्रह्म को प्राप्त होता है, उसे संक्षेप में सुन।

English Meaning

Learn from Me in brief, O son of Kunti, how one who has attained perfection reaches Brahman — that supreme consummation of knowledge.

51-53 श्लोक 18.51 – 18.53
बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्यात्मानं नियम्य च।
शब्दादीन्विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च।।51।।
विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः।
ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रितः।।52।।
अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम्।
विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते।।53।।
हिंदी अर्थ

विशुद्ध बुद्धि से युक्त, धैर्य से अपने को संयमित कर, शब्दादि विषयों को त्यागकर, राग-द्वेष हटाकर; एकान्त-सेवी, मित-आहारी, मन-वाणी-शरीर को वश में किये, सदा ध्यानयोग में तत्पर, वैराग्य का आश्रय लिए; अहंकार, बल, घमण्ड, काम, क्रोध और परिग्रह को त्यागकर, ममता-रहित और शान्त पुरुष ब्रह्म-प्राप्ति का पात्र बन जाता है।

English Meaning

Endowed with a pure intellect, controlling the self with firmness, giving up sound and other objects, casting aside attraction and aversion; dwelling in solitude, eating lightly, restraining speech, body and mind, ever absorbed in meditation, taking refuge in dispassion; freed from egoism, force, arrogance, desire, anger and possessiveness, selfless and at peace — such a one becomes fit for oneness with Brahman.

54 श्लोक 18.54
ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति।
समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम्।।54।।
हिंदी अर्थ

ब्रह्म से एकीभाव हुआ प्रसन्न-चित्त योगी न शोक करता है न इच्छा; सब प्राणियों में समभाव रखकर वह मेरी परा-भक्ति को प्राप्त होता है।

English Meaning

Having become one with Brahman, serene in self, he neither grieves nor desires; alike toward all beings, he attains supreme devotion to Me.

55 श्लोक 18.55
भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः।
ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्।।55।।
हिंदी अर्थ

उस परा-भक्ति से वह मुझे — मैं जो हूँ और जितना हूँ — तत्त्व से जान लेता है; और तत्त्व से जानकर तुरन्त मुझमें प्रवेश कर जाता है।

English Meaning

Through that devotion he comes to know Me in truth, what and who I am; and knowing Me in truth, he forthwith enters into Me.

56 श्लोक 18.56
सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः।
मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्।।56।।
हिंदी अर्थ

मेरे परायण हुआ कर्मयोगी सब कर्म करते हुए भी मेरी कृपा से सनातन अविनाशी परम पद को प्राप्त होता है।

English Meaning

Even while performing all actions, taking refuge in Me, he attains by My grace the eternal, imperishable abode.

57 श्लोक 18.57
चेतसा सर्वकर्माणि मयि संन्यस्य मत्परः।
बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव।।57।।
हिंदी अर्थ

मन से सब कर्म मुझमें अर्पित कर, मुझे ही परम मानकर, समबुद्धि-रूप योग का आश्रय लेकर निरन्तर मुझमें चित्त वाला हो।

English Meaning

Mentally surrendering all actions to Me, regarding Me as supreme, resorting to the yoga of even-mindedness, ever fix your mind on Me.

58 श्लोक 18.58
मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।
अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि।।58।।
हिंदी अर्थ

मुझमें चित्त लगाकर तू मेरी कृपा से सब कठिनाइयों को पार कर जाएगा; पर यदि अहंकारवश मेरी बात न सुनेगा, तो नष्ट हो जाएगा।

English Meaning

Fixing your mind on Me, you shall, by My grace, overcome all difficulties; but if from egoism you will not listen, you shall perish.

59 श्लोक 18.59
यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे।
मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति।।59।।
हिंदी अर्थ

यदि अहंकार के वश 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' — ऐसा मानता है, तो तेरा यह निश्चय मिथ्या है; तेरा स्वभाव ही तुझे (युद्ध में) लगा देगा।

English Meaning

If, indulging egoism, you think 'I will not fight', vain is this resolve; your own nature will compel you.

60 श्लोक 18.60
स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा।
कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।।60।।
हिंदी अर्थ

हे कौन्तेय! अपने स्वभाव-जनित कर्म से बँधा हुआ तू, जिसे मोहवश करना नहीं चाहता, उसे भी विवश होकर करेगा।

English Meaning

Bound by your own duty born of your nature, O son of Kunti, that which from delusion you do not wish to do, you will do even against your will.

61 श्लोक 18.61
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।।61।।
हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! ईश्वर सब प्राणियों के हृदय में स्थित है, और अपनी माया से सबको (मानो) यंत्र पर चढ़े हुए घुमाता रहता है।

English Meaning

The Lord dwells in the hearts of all beings, O Arjuna, whirling them all by His maya, as though mounted on a machine.

62 श्लोक 18.62
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत।
तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्।।62।।
हिंदी अर्थ

हे भारत! तू सब प्रकार से उसी परमेश्वर की शरण में जा; उसकी कृपा से तू परम शान्ति और सनातन परम धाम को प्राप्त होगा।

English Meaning

Take refuge in Him alone with your whole being, O Bharata; by His grace you shall attain supreme peace and the eternal abode.

63 श्लोक 18.63
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।
विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु।।63।।
हिंदी अर्थ

इस प्रकार यह गोपनीय से भी गोपनीय ज्ञान मैंने तुझे कहा; अब इसे पूरी तरह विचारकर, जैसा चाहे वैसा कर।

English Meaning

Thus has wisdom, more secret than all secrets, been declared to you by Me; reflect on it fully, and then act as you choose.

64 श्लोक 18.64
सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः।
इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्।।64।।
हिंदी अर्थ

सब गोपनीयों से अति गोपनीय मेरे परम वचन को फिर सुन; तू मुझे अत्यन्त प्रिय है, इसलिए यह हितकारी बात कहता हूँ।

English Meaning

Hear again My supreme word, the most secret of all; because you are dearly beloved by Me, I shall tell you what is good for you.

65 श्लोक 18.65
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे।।65।।
हिंदी अर्थ

मुझमें मन लगा, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन कर, मुझे प्रणाम कर; ऐसा करने से तू मुझे ही प्राप्त होगा — यह मैं सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ, क्योंकि तू मुझे प्रिय है।

English Meaning

Fix your mind on Me, be devoted to Me, worship Me, bow to Me; you shall come to Me — this I promise you truly, for you are dear to Me.

66 श्लोक 18.66
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।66।।
हिंदी अर्थ

सब धर्मों (कर्तव्य-कर्मों के आश्रय) को छोड़कर तू केवल मेरी शरण में आ जा; मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत कर।

English Meaning

Abandoning all duties, take refuge in Me alone; I shall free you from all sins — do not grieve.

67 श्लोक 18.67
इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन।
न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति।।67।।
हिंदी अर्थ

यह (गीता-ज्ञान) किसी तपहीन, भक्तिहीन, सुनने की इच्छा-रहित, या मुझमें दोष देखने वाले से कभी मत कहना।

English Meaning

This must never be told to one who is without austerity or devotion, who does not wish to hear, or who speaks ill of Me.

68 श्लोक 18.68
य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति।
भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः।।68।।
हिंदी अर्थ

जो परम प्रेम से इस गोपनीय गीता-शास्त्र को मेरे भक्तों से कहेगा, वह मुझे ही प्राप्त होगा — इसमें संदेह नहीं।

English Meaning

One who, with supreme devotion to Me, teaches this most secret knowledge to My devotees shall surely come to Me.

69 श्लोक 18.69
न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः।
भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि।।69।।
हिंदी अर्थ

उससे बढ़कर मेरा प्रिय कार्य करने वाला मनुष्यों में कोई नहीं, और पृथ्वी पर उससे प्रिय दूसरा कोई होगा भी नहीं।

English Meaning

Among men there is none who does Me dearer service than he; nor shall there be another on earth more dear to Me.

70 श्लोक 18.70
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः।
ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः।।70।।
हिंदी अर्थ

जो इस धर्ममय हमारे संवाद-रूप गीता को पढ़ेगा, उसके द्वारा भी मैं ज्ञानयज्ञ से पूजित होऊँगा — ऐसा मेरा मत है।

English Meaning

And one who studies this sacred dialogue of ours — by him too I am worshipped through the sacrifice of knowledge; this is My view.

71 श्लोक 18.71
श्रद्धावाननसूयश्च शृणुयादपि यो नरः।
सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम्।।71।।
हिंदी अर्थ

जो श्रद्धालु और दोषदृष्टि-रहित मनुष्य इसे सुनेगा भी, वह पापों से मुक्त होकर पुण्यवानों के श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त होगा।

English Meaning

And the man who listens to it with faith and without cavil — he too, freed from sin, attains the auspicious worlds of the righteous.

72 श्लोक 18.72
कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा।
कच्चिदज्ञानसम्मोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय।।72।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! क्या तूने इसे एकाग्र मन से सुना? हे धनंजय! क्या तेरा अज्ञानजनित मोह नष्ट हुआ?

English Meaning

Have you heard this, O Partha, with a one-pointed mind? Has your delusion born of ignorance been destroyed, O Dhananjaya?

73 श्लोक 18.73
अर्जुन उवाच
नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।
स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव।।73।।
हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और मुझे स्मृति प्राप्त हो गई; अब मैं संशयरहित और स्थिर हूँ, और आपकी आज्ञा का पालन करूँगा।

English Meaning

Arjuna said: My delusion is destroyed and I have gained recognition through Your grace, O Achyuta; I stand firm, my doubts gone, and I shall do Your word.

74 श्लोक 18.74
सञ्जय उवाच
इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः।
संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्।।74।।
हिंदी अर्थ

संजय बोले: इस प्रकार मैंने श्रीवासुदेव और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत और रोमांचकारी संवाद को सुना।

English Meaning

Sanjaya said: Thus have I heard this wonderful, thrilling dialogue between Vasudeva and the great soul Arjuna.

75 श्लोक 18.75
व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्।
योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्।।75।।
हिंदी अर्थ

व्यासजी की कृपा से (दिव्य दृष्टि पाकर) मैंने इस परम गोपनीय योग को साक्षात् योगेश्वर श्रीकृष्ण के मुख से, स्वयं कहते हुए, सुना।

English Meaning

Through the grace of Vyasa I have heard this supreme and secret yoga directly from Krishna, the Lord of yoga, declaring it Himself.

76 श्लोक 18.76
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्।
केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः।।76।।
हिंदी अर्थ

हे राजन्! श्रीकृष्ण और अर्जुन के इस पुण्य और अद्भुत संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बार-बार हर्षित होता हूँ।

English Meaning

O King, recalling again and again this wondrous and holy dialogue of Keshava and Arjuna, I rejoice over and over.

77 श्लोक 18.77
तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः।
विस्मयो मे महान् राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः।।77।।
हिंदी अर्थ

हे राजन्! श्रीहरि के उस अत्यन्त अद्भुत रूप को भी बार-बार स्मरण करके मेरे मन में महान आश्चर्य होता है और मैं बार-बार आनन्दित होता हूँ।

English Meaning

And recalling again and again that most marvellous form of Hari, great is my wonder, O King, and I rejoice again and again.

78 श्लोक 18.78
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।78।।
हिंदी अर्थ

हे राजन्! जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहीं श्री, विजय, विभूति और अटल नीति है — यही मेरा निश्चित मत है।

English Meaning

Wherever there is Krishna, the Lord of yoga, and wherever there is Arjuna, the wielder of the bow — there, I am sure, are fortune, victory, prosperity and unshakable righteousness.

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