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|| श्रीमद्भगवद्गीता ||

कर्मयोग

Karma Yog
निष्काम कर्म का योग
📜 43 श्लोक 📖 अध्याय 3
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 अध्याय सारांश

गीता का तीसरा अध्याय 'कर्मयोग' कर्म के रहस्य को खोलता है। अर्जुन पूछता है कि जब ज्ञान श्रेष्ठ है तो उसे युद्ध जैसे घोर कर्म में क्यों लगाया जा रहा है। उत्तर में श्रीकृष्ण समझाते हैं कि कोई भी क्षणभर बिना कर्म किये नहीं रह सकता, इसलिए कर्म छोड़ना नहीं बल्कि आसक्ति छोड़कर निष्काम भाव से कर्तव्य करना ही श्रेष्ठ मार्ग है। वे यज्ञ-भाव, लोकसंग्रह (समाज-कल्याण) और श्रेष्ठ पुरुष के उदाहरण-मूल्य पर ज़ोर देते हैं और स्वयं को आदर्श बताते हैं — 'मुझे कुछ पाना शेष नहीं, फिर भी मैं कर्म करता हूँ।' अध्याय के अंत में वे काम (इच्छा) और क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताते हैं जो ज्ञान को ढक देता है, और इन्द्रिय-संयम से इसे जीतने का उपाय बताते हैं।

 Chapter Summary (English)

The third chapter of the Gita, 'Karma Yoga', unfolds the secret of action. Arjuna asks why he is pushed into the terrible act of war if knowledge is superior. Krishna replies that no one can stay even a moment without acting; hence the answer is not to abandon action but to do one's duty selflessly, free from attachment. He stresses the spirit of yajna (selfless sacrifice), lokasangraha (the welfare of society) and the example-setting power of great people, citing Himself as the model — 'There is nothing I need to attain, yet I keep acting.' The chapter ends by naming desire (kama) and anger as the greatest enemies that veil wisdom, and prescribes mastery of the senses as the way to conquer them.

श्लोक

कुल 43 श्लोक

1 श्लोक 3.1
अर्जुन उवाच
ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन।
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव।।1।।
हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे जनार्दन! यदि आप कर्म की तुलना में ज्ञान (बुद्धि) को श्रेष्ठ मानते हैं, तो फिर हे केशव! आप मुझे इस भयंकर कर्म (युद्ध) में क्यों लगा रहे हैं?

English Meaning

Arjuna said: O Janardana, if You hold knowledge to be superior to action, then why, O Keshava, do You push me into this terrible deed of war?

2 श्लोक 3.2
व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे।
तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम्।।2।।
हिंदी अर्थ

आपके मिले-जुले से लगते वचन मेरी बुद्धि को मानो उलझा रहे हैं। इसलिए कृपया वह एक निश्चित बात बताइए जिससे मेरा सच्चा कल्याण हो।

English Meaning

Your seemingly mixed words confuse my understanding. Tell me decisively that one path by which I may attain the highest good.

3 श्लोक 3.3
श्रीभगवानुवाच
लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ।
ज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम्।।3।।
हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: हे निष्पाप! इस संसार में दो प्रकार की निष्ठाएँ मैंने पहले बतायी हैं — सांख्ययोगियों की निष्ठा ज्ञानयोग से और कर्मयोगियों की निष्ठा कर्मयोग से सधती है।

English Meaning

The Blessed Lord said: O sinless one, two paths were taught by Me of old — the path of knowledge for the contemplatives, and the path of action for the yogis.

4 श्लोक 3.4
न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते।
न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति।।4।।
हिंदी अर्थ

मनुष्य न तो कर्मों को आरम्भ किये बिना निष्कर्म-अवस्था पाता है, और न केवल कर्मों के त्यागमात्र से सिद्धि को प्राप्त करता है।

English Meaning

One attains neither freedom from action by abstaining from work, nor perfection merely by renouncing action.

5 श्लोक 3.5
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः।।5।।
हिंदी अर्थ

सच तो यह है कि कोई भी क्षणभर के लिए भी बिना कर्म किये नहीं रह सकता, क्योंकि प्रकृति से उपजे गुण हर व्यक्ति से विवश होकर कर्म करवाते ही रहते हैं।

English Meaning

Indeed, no one can remain even for a moment without acting; everyone is helplessly driven to act by the qualities (gunas) born of nature.

6 श्लोक 3.6
कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन्।
इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते।।6।।
हिंदी अर्थ

जो व्यक्ति बाहर से कर्मेन्द्रियों को रोककर बैठ जाता है पर मन में विषयों का ही चिन्तन करता रहता है, वह मूढबुद्धि दम्भी (मिथ्याचारी) कहलाता है।

English Meaning

One who restrains the organs of action outwardly but keeps brooding on sense-objects in the mind is a deluded hypocrite.

7 श्लोक 3.7
यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन।
कर्मेन्द्रियैः कर्मयोगमसक्तः स विशिष्यते।।7।।
हिंदी अर्थ

परन्तु हे अर्जुन! जो मन से इन्द्रियों को वश में रखकर, अनासक्त भाव से कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्मयोग का पालन करता है, वही श्रेष्ठ है।

English Meaning

But one who controls the senses by the mind and, unattached, engages the organs of action in karma-yoga — he, O Arjuna, excels.

8 श्लोक 3.8
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः।।8।।
हिंदी अर्थ

तू अपना नियत (शास्त्र-विहित) कर्तव्य कर, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना उत्तम है; कर्म छोड़ देने पर तो तेरे शरीर का निर्वाह भी नहीं हो पायेगा।

English Meaning

Perform your prescribed duty, for action is better than inaction; without action even the upkeep of your body would not be possible.

9 श्लोक 3.9
यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।
तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर।।9।।
हिंदी अर्थ

यज्ञ (निःस्वार्थ कर्तव्य) के लिए किये गये कर्मों को छोड़कर बाकी सब कर्म मनुष्य को बाँधते हैं। इसलिए हे कुन्तीपुत्र! आसक्ति छोड़कर यज्ञ-भाव से ही अपना कर्तव्य कर।

English Meaning

Except for work done as yajna (selfless sacrifice), all work binds one to the world. Therefore, O son of Kunti, do your duty free from attachment, in that spirit.

10 श्लोक 3.10
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः।
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक्।।10।।
हिंदी अर्थ

सृष्टि के आरम्भ में प्रजापति ब्रह्मा ने यज्ञ सहित प्रजा को रचकर कहा — 'इस यज्ञ से तुम वृद्धि पाओ; यह तुम्हारी इच्छित कामनाओं को पूरा करने वाला हो।'

English Meaning

At the dawn of creation, Prajapati created beings along with yajna and said: 'By this you shall flourish; let it grant you all you desire.'

11 श्लोक 3.11
देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः।
परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ।।11।।
हिंदी अर्थ

इस यज्ञ से तुम देवताओं को संतुष्ट/उन्नत करो और वे देवता तुम्हें उन्नत करें; इस तरह निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे को बढ़ाते हुए तुम परम कल्याण पाओगे।

English Meaning

Nourish the gods through yajna, and may they nourish you; thus sustaining one another selflessly, you shall attain the highest good.

12 श्लोक 3.12
इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः।
तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव सः।।12।।
हिंदी अर्थ

यज्ञ से प्रसन्न देवता तुम्हें बिना माँगे ही इच्छित भोग देते रहेंगे। जो उनके दिये हुए को (समाज/यज्ञ को) लौटाये बिना अकेला भोगता है, वह वास्तव में चोर है।

English Meaning

Pleased by yajna, the gods will grant the enjoyments you wish; but one who enjoys their gifts without offering anything in return is verily a thief.

13 श्लोक 3.13
यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः।
भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात्।।13।।
हिंदी अर्थ

यज्ञ से बचे अन्न को ग्रहण करने वाले सज्जन सब पापों से मुक्त हो जाते हैं; पर जो केवल अपने ही पोषण के लिए पकाते हैं, वे पापी मानो पाप ही खाते हैं।

English Meaning

The good, who eat what remains after yajna, are freed from all sins; but those who cook only for themselves eat sin.

14-15 श्लोक 3.14 – 3.15
अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः।
यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः।।14।।
कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम्।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम्।।15।।
हिंदी अर्थ

सभी प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं, अन्न वर्षा से, वर्षा यज्ञ से, और यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है। कर्म को वेद (ब्रह्म) से और वेद को अविनाशी परमात्मा से उत्पन्न जान। इसी से सिद्ध है कि सर्वव्यापी परमात्मा सदा यज्ञ में प्रतिष्ठित है।

English Meaning

All beings arise from food, food from rain, rain from yajna, and yajna from action. Know that action springs from the Vedas (Brahman), and the Vedas from the imperishable Supreme. Thus the all-pervading Brahman ever rests in yajna.

16 श्लोक 3.16
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः।
अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति।।16।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! जो इस लोक में इस प्रकार चल रहे सृष्टि-चक्र का अनुसरण नहीं करता (अपना कर्तव्य नहीं निभाता), वह इन्द्रिय-भोगों में डूबा पापमय जीवन व्यर्थ ही जीता है।

English Meaning

O Partha, one who does not follow the wheel thus set in motion — steeped in sense-pleasures and sin — lives in vain.

17 श्लोक 3.17
यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः।
आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते।।17।।
हिंदी अर्थ

किन्तु जो मनुष्य आत्मा में ही रमता है, आत्मा में ही तृप्त और संतुष्ट रहता है, उसके लिए कोई कर्तव्य शेष नहीं रहता।

English Meaning

But for the one who delights in the Self, is satisfied with the Self and content in the Self alone — for him no duty remains.

18 श्लोक 3.18
नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन।
न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः।।18।।
हिंदी अर्थ

ऐसे आत्मतृप्त महापुरुष का इस जगत में न कर्म करने से कोई स्वार्थ रहता है, न न करने से; किसी भी प्राणी पर उसका कोई स्वार्थपूर्ण आश्रय नहीं रहता।

English Meaning

Such a one has nothing to gain by acting or by not acting here, nor does he depend on any being for any selfish end.

19 श्लोक 3.19
तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः।।19।।
हिंदी अर्थ

इसलिए तू आसक्ति छोड़कर सदा अपना कर्तव्य कर्म करता रह; क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करने वाला मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेता है।

English Meaning

Therefore, perform your duty always without attachment; for by working unattached one attains the Supreme.

20 श्लोक 3.20
कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि।।20।।
हिंदी अर्थ

राजा जनक जैसे ज्ञानी भी अनासक्त कर्म से ही परम सिद्धि को पहुँचे थे। लोक-कल्याण (लोकसंग्रह) को ध्यान में रखकर भी तुझे कर्म करना ही उचित है।

English Meaning

Even sages like King Janaka attained perfection through action alone. You too should act, keeping in view the welfare of the world (lokasangraha).

21 श्लोक 3.21
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।21।।
हिंदी अर्थ

श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, सामान्य लोग भी वैसा ही करने लगते हैं; वह जो आदर्श (प्रमाण) स्थापित करता है, सारा समाज उसी का अनुसरण करता है।

English Meaning

Whatever a great person does, others follow; whatever standard he sets, the world pursues it.

22 श्लोक 3.22
न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन।
नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि।।22।।
हिंदी अर्थ

हे पार्थ! तीनों लोकों में मेरे लिए न कोई कर्तव्य शेष है, न कोई अप्राप्त वस्तु पाने योग्य है — फिर भी मैं कर्म में ही लगा रहता हूँ।

English Meaning

O Partha, in all three worlds there is nothing I must do, nothing unattained that I need to gain — yet I remain engaged in action.

23 श्लोक 3.23
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः।।23।।
हिंदी अर्थ

क्योंकि हे पार्थ! यदि कभी मैं सावधानी से कर्म न करूँ, तो (बड़ी हानि हो जाए) — क्योंकि मनुष्य हर तरह से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।

English Meaning

For if I did not engage tirelessly in action, O Partha, people would follow My path in every way.

24 श्लोक 3.24
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम्।
संकरस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः।।24।।
हिंदी अर्थ

यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सब लोक नष्ट-भ्रष्ट हो जायें; मैं वर्ण-संकरता का कारण बनूँ और इस समस्त प्रजा के विनाश का दोषी ठहरूँ।

English Meaning

If I did not act, these worlds would perish; I would cause confusion and become the destroyer of these people.

25 श्लोक 3.25
सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम्।।25।।
हिंदी अर्थ

हे भारत! जैसे आसक्त अज्ञानी कर्म करते हैं, वैसे ही ज्ञानी भी — पर अनासक्त रहकर — लोक-कल्याण की इच्छा से कर्म करे।

English Meaning

As the ignorant act with attachment, O Bharata, so should the wise act — but without attachment — desiring the welfare of the world.

26 श्लोक 3.26
न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम्।
जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन्।।26।।
हिंदी अर्थ

ज्ञानी पुरुष को चाहिए कि कर्म में आसक्त अज्ञानियों की बुद्धि में भ्रम न डाले (कर्म के प्रति अश्रद्धा न जगाये); बल्कि स्वयं सब कर्म ठीक से करते हुए उन्हें भी वैसा ही करने को प्रेरित करे।

English Meaning

The wise should not unsettle the minds of the ignorant attached to action; rather, performing all actions well himself, he should inspire them to act likewise.

27 श्लोक 3.27
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते।।27।।
हिंदी अर्थ

वास्तव में सारे कर्म प्रकृति के गुणों द्वारा किये जाते हैं; फिर भी अहंकार से मोहित मनुष्य 'मैं कर्ता हूँ' — ऐसा मान बैठता है।

English Meaning

In truth, all actions are performed by the gunas of nature; yet one deluded by ego thinks, 'I am the doer.'

28 श्लोक 3.28
तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः।
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते।।28।।
हिंदी अर्थ

परन्तु हे महाबाहो! गुण और कर्म के विभाग के तत्त्व को जानने वाला, यह समझकर कि गुण ही गुणों में बरत रहे हैं, उनमें आसक्त नहीं होता।

English Meaning

But one who knows the truth about the divisions of gunas and actions, O mighty-armed, understands that the gunas merely act among the gunas, and remains unattached.

29 श्लोक 3.29
प्रकृतेर्गुणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु।
तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत्।।29।।
हिंदी अर्थ

प्रकृति के गुणों से अत्यधिक मोहित लोग गुणों और कर्मों में आसक्त रहते हैं; पूर्ण ज्ञानी को चाहिए कि वह ऐसे अधूरे ज्ञान वाले मन्दबुद्धि लोगों को विचलित न करे।

English Meaning

Those deluded by the gunas cling to the gunas and their works; the wise should not unsettle these dull-witted ones of incomplete understanding.

30 श्लोक 3.30
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः।।30।।
हिंदी अर्थ

सम्पूर्ण कर्मों को मुझ अन्तर्यामी में अर्पित करके, आत्म-भाव में स्थित होकर, आशा-ममता और मन के संताप से रहित होकर तू युद्ध कर।

English Meaning

Dedicating all actions to Me with a mind fixed on the Self, free from craving, possessiveness and mental fever — fight!

31 श्लोक 3.31
ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः।
श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः।।31।।
हिंदी अर्थ

जो मनुष्य श्रद्धा रखते हुए और दोष-दृष्टि छोड़कर मेरे इस मत का सदा पालन करते हैं, वे भी सब कर्मों के बन्धन से मुक्त हो जाते हैं।

English Meaning

Those who, full of faith and free from faultfinding, constantly follow this teaching of Mine are also released from the bondage of action.

32 श्लोक 3.32
ये त्वेतदभ्यसूयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम्।
सर्वज्ञानविमूढांस्तान्विद्धि नष्टानचेतसः।।32।।
हिंदी अर्थ

परन्तु जो मुझमें दोष ढूँढते हुए मेरे इस मत पर नहीं चलते, उन मूढ़ों को सब प्रकार के ज्ञान से वंचित, विवेकहीन और नष्ट हुआ ही समझ।

English Meaning

But those who carp at My teaching and do not follow it — know them to be deluded in all knowledge, senseless and lost.

33 श्लोक 3.33
सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि।
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति।।33।।
हिंदी अर्थ

ज्ञानी भी अपने स्वभाव के अनुसार ही चेष्टा करता है; सभी प्राणी अपनी प्रकृति के वश में हैं — फिर बलपूर्वक दमन (हठ) क्या कर लेगा?

English Meaning

Even the wise act according to their own nature; all beings follow their nature — what can forced suppression accomplish?

34 श्लोक 3.34
इन्द्रियस्येन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ।
तयोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ।।34।।
हिंदी अर्थ

हर इन्द्रिय के विषय में राग और द्वेष छिपे रहते हैं; मनुष्य को इन दोनों के वश में नहीं आना चाहिए, क्योंकि ये ही उसके कल्याण-मार्ग के शत्रु हैं।

English Meaning

Attachment and aversion lie hidden in the senses' relation to their objects; one should not fall under their sway, for they are the foes on one's path.

35 श्लोक 3.35
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।35।।
हिंदी अर्थ

भले ही गुणरहित क्यों न हो, अपना धर्म दूसरे के भलीभाँति निभाये धर्म से श्रेष्ठ है; अपने धर्म में मरना भी कल्याणकारी है, पराया धर्म भय देने वाला है।

English Meaning

Better one's own duty, though imperfect, than another's duty well performed; better to die in one's own duty — another's duty brings danger.

36 श्लोक 3.36
अर्जुन उवाच
अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः।
अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः।।36।।
हिंदी अर्थ

अर्जुन बोले: हे वार्ष्णेय (कृष्ण)! तो फिर मनुष्य न चाहते हुए भी, मानो किसी बल से धकेला जाकर, किसकी प्रेरणा से पाप कर बैठता है?

English Meaning

Arjuna said: But then, O Varshneya, by what is a person impelled to commit sin, even unwillingly, as if driven by force?

37 श्लोक 3.37
श्रीभगवानुवाच
काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः।
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्।।37।।
हिंदी अर्थ

श्री भगवान बोले: रजोगुण से उत्पन्न यह काम ही (बाधित होने पर) क्रोध बन जाता है; यह कभी न तृप्त होने वाला और महापापी है — इसी को तू यहाँ अपना शत्रु जान।

English Meaning

The Blessed Lord said: It is desire, it is anger, born of the quality of rajas — all-devouring and most sinful. Know this to be the enemy here.

38 श्लोक 3.38
धूमेनाव्रियते वह्निर्यथादर्शो मलेन च।
यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम्।।38।।
हिंदी अर्थ

जैसे धुएँ से आग, मैल से दर्पण, और झिल्ली से गर्भ ढका रहता है, वैसे ही इस काम से ज्ञान ढका रहता है।

English Meaning

As fire is veiled by smoke, a mirror by dust, and an embryo by the womb, so is knowledge veiled by this desire.

39 श्लोक 3.39
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा।
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च।।39।।
हिंदी अर्थ

हे कुन्तीपुत्र! आग के समान कभी न बुझने वाले, ज्ञानी के इस नित्य-शत्रु कामरूपी अग्नि से मनुष्य का ज्ञान ढका रहता है।

English Meaning

O son of Kunti, knowledge is veiled by this constant enemy of the wise — desire — insatiable like fire.

40 श्लोक 3.40
इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते।
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम्।।40।।
हिंदी अर्थ

इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि — ये इसके निवास-स्थान कहे जाते हैं; इन्हीं के द्वारा यह काम ज्ञान को ढककर जीवात्मा को मोहित करता है।

English Meaning

The senses, the mind and the intellect are said to be its seat; through these it veils knowledge and deludes the embodied soul.

41 श्लोक 3.41
तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ।
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम्।।41।।
हिंदी अर्थ

इसलिए हे भरतश्रेष्ठ! तू पहले इन्द्रियों को वश में करके इस ज्ञान-विज्ञान का नाश करने वाले पापी काम को अवश्य ही मार डाल।

English Meaning

Therefore, O best of the Bharatas, first master the senses and then slay this sinful destroyer of knowledge and wisdom — desire.

42 श्लोक 3.42
इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः।
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः।।42।।
हिंदी अर्थ

कहा जाता है कि इन्द्रियाँ (स्थूल शरीर से) श्रेष्ठ हैं, इन्द्रियों से श्रेष्ठ मन, मन से श्रेष्ठ बुद्धि, और जो बुद्धि से भी परे है — वह आत्मा है।

English Meaning

The senses are said to be higher than the body, the mind higher than the senses, the intellect higher than the mind; and what is higher than the intellect is the Self.

43 श्लोक 3.43
एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना।
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम्।।43।।
हिंदी अर्थ

इस प्रकार बुद्धि से परे आत्मा को जानकर, बुद्धि के द्वारा मन को स्थिर करके, हे महाबाहो! तू इस दुर्जय कामरूपी शत्रु को मार डाल।

English Meaning

Thus knowing the Self to be higher than the intellect, and steadying the mind by the higher reason, O mighty-armed, slay this enemy in the form of desire, so hard to conquer.

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